जगन्नाथ मंदिर के 8 रहस्य, जहां विज्ञान भी पड़ जाता है फीका
ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ देव का मंदिर चार धामों में एक धाम है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ अपनी छोटी बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम समेत विराजमान हैं।
मंदिर में भगवान जगन्नाथ की लकड़ी से बनी मूर्ति का काफी अद्भुत स्वरूप है। कहा जाता है कि इसमें भगवान श्रीकृष्ण का दिल ब्रह्म पदार्थ के रूप में स्थापित है जो आज भी धड़कता है।
जगन्नाथ मंदिर के कई रहस्य ऐसे हैं, जिनके बारे में ना तो विज्ञान का कोई तर्क काम आता है और ना ही इन्हें आज तक कोई सुलझा सका है।
1. जगन्नाथ मंदिर का ध्वज हवा के विपरित दिशा में लहराता है। इस मंदिर के अलग-बगल में स्थित मंदिरों के ध्वज हवा की दिशा में लहराते हैं लेकिन जगन्नाथ मंदिर का नहीं।
2. जगन्नाथ मंदिर परिसर में किसी भी इंसान, पशु या फिर पक्षी की परछाई नहीं बनती है। मंदिर के शिखर की छाया भी दिन भर में कहीं नजर नहीं आती है।
3. मंदिर के रसोई में एक के ऊपर एक 7 मिट्टी के बर्तन रखकर खाना पकाया जाता है और सबसे पहले सबसे ऊपर वाले बर्तन का भोजन पकता है।
4. पुरी के मंदिर के ऊपर कोई भी पक्षी नहीं बैठता है। ना ही इस मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी यहां तक कि कोई विमान भी नहीं गुजरता है।
5. पुरी के मंदिर के ठीक बाहर समुद्र का काफी शोर सुनाई देता है लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति मंदिर के अंदर अपना पहला कदम रखता है आश्चर्यजनक रूप से यह शोर पूरी तरह से सुनाई देना बंद हो जाता है।
6. मंदिर के गुंबद पर लगा अष्टधातु का बना सुदर्शन चक्र या नीलचक्र पुरी के हर कोने से दिखायी देता है और हर कोने से यह आपके सामने की ओर ही लगा दिखता है।
7. मंदिर के ठीक बाहर स्वर्ग द्वार है जो पुरी का सबसे बड़ा श्मशान है। यहां हर वक्त लाशों की चिताएं जलती रहती हैं लेकिन इनकी जरा सी भी दुर्गंध मंदिर के अंदर नहीं आती है।
8. मंदिर के गुंबद पर लगे विशाल झंडे को बदलने के लिए हर रोज शाम को एक व्यक्ति 214 फुट ऊंचे मंदिर पर चढ़ता है। चौंकाने वाली बात है कि वह व्यक्ति बिना किसी सहारे के ऊंचे गुंबद पर सरलता से चढ़ता और उतरता है।