सुबह नींद से उठते ही हर कोई पहले सभी चाय ही ढूंढता है। गर्मी हो, बारिश हो या सर्दी का मौसम हो, खुशी हो या उदासी का माहौल हो, चाय हमेशा रहता है।
जानकर हैरानी होगी कि चाय का आविष्कार हमारे देश में नहीं हुआ था, बल्कि यह किसी दूसरे देश से भारत आयी थी।
चीन के एक राजा बगीचे में बैठकर गर्म पानी पी रहे थे। उस पानी में एक पत्ता गिर गया, जिससे पानी का रंग बदल गया और स्वाद भी अच्छा हो गया। वह चाय का ही पत्ता था।
इसके बाद चीन में चायपत्ति को उगाया जाने लगा, जिनसे खरीद कर अंग्रेज चुस्कियों पर चुस्कियां भरते थे।
1835-36 में पहले ओपियम वॉर के समय चीन अड़ गया और अंग्रेजों चायपत्ति देने से इंकार कर दिया। इधर असम में उसी समय चायपत्ति की तरह का ही एक पेड़ भी पाया गया।
बस फिर क्या था, असम में चायपत्ति उगायी जाने लगी। लेकिन यहां चायपत्ति अंग्रेजों की जरूरत से कहीं ज्यादा उगने लगी।
इतनी अधिक मात्रा में उगी चायपत्ति की खपत कराने के लिए अंग्रेजों ने रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त में चाय बांटना शुरू कर दिया।
इस तरह से भारतीयों को चाय की लत लग गयी और भारत चाय का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया।
मजे की बात तो यह है कि भारत जितना चाय बनाता है, उसका 70 प्रतिशत तो वह खुद ही पी जाता है।
भारत में आज कई तरह के जैसे मसाला चाय, हर्बल टी, ग्रीन टी, मलाई वाली, कुल्हड़ वाली चाय के दीवाने मिल जाएंगे।