मुगल शासक और बादशाह अकबर के पुत्र जहांगीर उर्फ सलीम की एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग कब्रें हैं और दोनों कब्रों में ही जहांगीर दफन हैं।
जहांगीर का एक कब्र भारत के कश्मीर में है तो दूसरा कब्र पाकिस्तान के लाहौर में मौजूद है और दोनों जगह उनकी मजार बनी हुई है।
इनमें से एक कब्र में मुगल शासक जहांगीर का शरीर दफन और दूसरे कब्र में उनकी आंतों को दफन किया गया है।
जहांगीर की आंतों को उनके शरीर से बाहर निकालकर कश्मीर के राजोरी के चिंगस में दफन किया गया था। इसका उल्लेख 'तुजुके जहांगीर' पुस्तक में भी मिलता है, जो जम्मू की रणवीर लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी हुई है।
उनका शरीर पाकिस्तान के लाहौर के शहादरा में दफन किया गया था।
चिंगस सराय का इस्तेमाल अक्सर मुगर शासक द्वारा पाकिस्तान वाले हिस्से से कश्मीर आते-जाते समय किया जाता था। जहांगीर गर्मियों में अपनी फौज के साथ कश्मीर आ जाते थे।
1627 को कश्मीर से वापस लौटते समय चिंगस में उनकी मृत्यु हो गयी जिसकी सूचना उनकी पत्नी नूरजहां को दी गयी। पर्शियन शब्द चिंग का अर्थ अंतड़ियां होता है।
नूरजहां ने बादशाह की मौत की खबर को गुप्त रखने और शव को शहादरा लाहौर लाने के लिए कहा।
जहांगीर की आंतों को निकालकर चिंगस में ही दफन कर दिया गया ताकि उनका शव लाहौर पहुंचने से पहले खराब ना हो जाए।