कश्मीर घाटी के सबसे सुन्दर जगहों में से एक है पहलगाम। चारों तरफ से बर्फिली चोटियों वाले पहाड़ों के बीच से होकर बहती लिडर नदी और नदी के किनारों पर बसा घना जंगल। इस छोटे से गांव के हर एक कोने में मौजूद है सिर्फ नैसर्गिक सुन्दरता। पहलगाम पवित्र अमरनाथ गुफा का बेस भी है। इस वजह से यहां पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन...

कश्मीर घाटी की रटी-रटाई जगहों जैसे श्रीनगर और उसके बाग-बगिचे, डल झील, शंकराचार्य मंदिर, गुलमर्ग या सोनमर्ग के साथ-साथ किसी ऑफबीट जगह पर भी घूमना चाहते हैं तो एक बार पहलगाम के ममलेश्वर मंदिर में जरूर जाइए।
चौथी सदी में निर्मित है मंदिर
कश्मीर के पहलगाम में स्थित ममलेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण करीब चौथी शताब्दी में किया गया था। पहलगाम के पास स्थित ममलका गांव में यह मंदिर स्थित है। पूरी तरह से काले पत्थरों से निर्मित इस मंदिर के गर्भगृह की ऊंचाई महज 8 फीट है। मंदिर की वास्तुकला को देखकर ही पता चलता है कि यह कश्मीर की परंपरागत शैली में निर्मित है, जिसमें घरों के छत दो स्तरीय पिरामिड की आकृति में बने होते हैं, ताकि सर्दियों के दिनों में छत पर बर्फ जमा न हो सकें।

लिडर नदी के किनारे बना यह मंदिर समुद्रतल से करीब 2200 मीटर (7200 फीट) की ऊंचाई पर बना हुआ है। कश्मीर जाने वाले काफी कम सैलानियों को ही इस मंदिर के बारे में जानकारी होती है, इसलिए मंदिर में अधिक भीड़ भी नहीं मिलेगी।
क्या है पौराणिक कथा
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहीं वह स्थान है, जहां भगवान गणेश को उनका गजमस्तक मिला था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने हल्दी और अपने शरीर के मैल से एक बालक को जन्म दिया। उस बालक को उन्होंने अपने कमरे के बाहर पहला पर बैठाकर स्नान करने गयी। इस बीच भगवान शिव वहां आए। जब उन्होंने माता पार्वती के कमरे में प्रवेश करने की कोशिश की तो नन्हें गणेश ने उन्हें रोक दिया। बात बढ़ गयी और भगवान शिव व गणेश में युद्ध होने लगा।

महादेव ने क्रोध में आकर जब गणेश का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया तो माता पार्वती ने विलाप करते हुए उन्हें सारी बात बतायी। इसके बाद भगवान शिव ने देवताओं को भगवान गणेश के लिए सिर लाने के लिए भेजा। ममलेश्वर मंदिर ही वह स्थान माना जाता है, जहां भगवान गणेश के धड़ से उनके सिर को जोड़ा था।
हो सकता है कि ममेश्वर मंदिर
ममलेश्वर मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। मम और मल जिसका अर्थ होता है मत जाओ। मंदिर के बाहर एक सरकारी बोर्ड भी लगा हुआ है जिसमें इस बात के संकेत हैं कि यह मंदिर कल्हण के शाही इतिहास राजतरंगिणी में 12वीं शताब्दी में उल्लेखित ममेश्वर मंदिर भी हो सकता है, जहां राजा जयसिम्हा ने सोने के कलश स्थापित किया गया था। हालांकि इस मंदिर का कोई स्पष्ट इतिहास नहीं मिलता है लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि यह मंदिर कश्मीर घाटी में आज भी अपनी ऐतिहासिकता को समेटे हुए मौन खड़ा है।

अगर आप किसी ऑफबीट जगह या भीड़भाड़ से दूर घूमने की जगह तलाश रहे हैं तो घाटी का ममलेश्वर मंदिर आपके लिए बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन हो सकता है।
आसपास घूमने की जगह
- आरू गांव
- पहलगाम गोल्फ कोर्स
- कोलाहोई ग्लेशियर
- बैसरन हिल्स
- बेताब वैली
- आरू वैली
कैसे पहुंचे ममलेश्वर मंदिर
सड़क मार्ग :- पहलगाम सड़क मार्ग से जम्मु-कश्मीर और श्रीनगर से बहुत अच्छी तरह ही जुड़ा हुआ है। श्रीनगर या फिर जम्मु से पहलगाम के लिए किराए पर गाड़ियां मिल जाएंगी।
रेल मार्ग :- पहलगाम का नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मु स्टेशन है, जो यहां से करीब 255 किमी दूर है। अगर आप जम्मु स्टेशन से सीधे पहलगाम ममलेश्वर मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको स्टेशन के बाहर से टैक्सी मिल जाएंगी। हालांकि इसका किराया ज्यादा हो सकता है। जम्मु से पहलगाम स्टेशन तक के लिए टैक्सी का किराया करीब 3000 रुपये तक हो सकता है जो पिक सीजन में और भी बढ़ सकता है।
एयरपोर्ट :- पहलगाम का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट श्रीनगर एयरपोर्ट है, जो यहां से करीब 95 किमी की दूरी पर है। श्रीनगर एयरपोर्ट के बाहर से भी आपको पहलगाम तक के लिए गाड़ियां मिल जाएंगी।



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