हम यहां मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के बारे में चर्चा कर रहे हैं, यहां के इतिहास, भूगोल और सामाजिक संरचना पर एक नज़र...
Ajay Mohan
वैज्ञानिकों की मानें तो जबलपुर से प्राप्त जीवाश्म इस बात के प्रमाण हैं कि यहां पुरापाषाण युग के मनुष्य का निवास स्थान था।
पुरा-पाषाण युग में जबलपुर
पुराणों के अनुसार जबलपुर का नाम जाबालि ऋषि से है। जिनके बारे में कहा जाता है कि वह यहीं निवास करते थे।
वेद-पुराण में जबलपुर
यहां का मदन महल लगभग 1100 ई. में राजा मदन सिंह ने बनवाया था। यह एक गोंड महल है। महल से पश्चिम की ओर बढ़ने वाला क्षेत्र 14वीं शताब्दी में चार स्वतंत्र गोंड राज्यों का प्रमुख नगर था।
11वीं सदी में जबलपुर
इस शहर में कई बौद्ध, हिन्दू और जैन भग्नावशेष भी हैं, जो प्रमाणित करते हैं कि यह शहर भगवान बुद्ध के समय में समृद्ध शहर था।
बुद्ध काल में जबलपुर
मराठाओं का मुख्यालय
1781 के बाद से जबलपुर को मराठा साम्राज्य का मुख्यालय बना दिया गया जिससे पूरे देश में यह शहर चर्चा में आया। आगे चलकर ब्रिटिश कमीशन का मुख्यालय भी यहीं बना।
राज्य में न्याय का मुख्यालय यानि कि हाई-कोर्ट! जी हां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में ही है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
जबलपुर ने एक शहर का रूप तब लिया जब 1864 में यहां नगरपालिका का गठन किया गया।
1884 में बना जबलपुर शहर
जबलपुर शहर मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के उत्तर में निचली पहाड़ियों से घिरे चट्टानी बेसिन में झीलों और मंदिरों के बीच स्थित है।
जबलपुर का भूगोल
जबलपुर की खनिज संपदा
एमपी के इस शहर में डोलोमाइट, लेटराइट, आयरन, फायर क्ले, मैंगनीज़ आदि का भंडार है।
जबलपुर में शहरी क्षेत्र की साक्षरता दर 87.04% है जबकि ग्रामीण क्षेत्र की 72.36% है।
पढ़ाई पर फोकस
सिटी ऑफ मार्बल अब फर्नीचर के उत्पादन में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यहां की 90 प्रतिशत एमएसएमई ने यहां क्लस्टर बनाने की मांग सरकार से की है।