देशभर में ऐसे कई पुल हैं, जो सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान रखते हैं। ऐसा ही एक ब्रिज कोलकाता का 'हावड़ा ब्रिज' है।
कोलकाता और हावड़ा जुड़वा शहरों को जोड़ने वाली 'हावड़ा ब्रिज' का निर्माण 1936 में शुरू हुआ था और 1942 को पूरा हुआ था।
इसके अगले साल 3 फरवरी 1943 को आम जनता के लिए इसे खोल दिया गया था। 1965 में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर इसका नाम रवींद्र सेतु रखा गया।
आश्चर्य की बात है कि इस ब्रिज का कभी आधिकारिक तौर पर उद्घाटन ही नहीं किया गया, क्योंकि तब द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था।
हुगली नदी से होकर रोजाना आवाजाही करने वाले जहाजों के रास्ते में खंभे रुकावट उत्पन्न ना करें, इसलिए इसमें कोई खंभा नहीं बनाया गया।
यह ब्रिज दोनों सिरों पर बने सिर्फ दो खंभों पर टिका है, जिनके बीच की दूरी डेढ़ हजार फीट की है।
हावड़ा ब्रिज को बनाने में 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था जिसमें से 23,500 टन स्टील टाटा स्टील ने मुहैया करवायी थी।