एक गांव के लोग ट्रेन या बस पकड़ने पड़ोस के गांव या शहर में जाते हैं जो दूसरे राज्य में पड़ता है। आपने ऐसे गांवों के बारे में तो खूब सुना होगा। आपने ऐसा भी सुना होगा कि बॉर्डर पर मौजूद किसी गांव के लोग पड़ोसी राज्य में पीने का पानी भरने जाते हो। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे गांव या शहर के बारे में सुना है जो मौजूद तो एक राज्य में है लेकिन कहलाता दूसरे राज्य का है...। नहीं न।

आज हम आपको ऐसे ही एक गांव के बारे में बता रहे हैं। मध्य प्रदेश का सीमावर्ती जिला है अलीराजपुर, जो गुजरात की सीमा से सटा हुआ है। गुजरात का गांव साजनपुर, मध्य प्रदेश के इसी जिले का कहलाता है। आखिर क्या है इसकी दिलचस्प वजह?
कहां मौजूद है साजनपुर गांव?
साजनपुर मध्य प्रदेश की सीमा से लगभग 3 किमी की दूरी पर गुजरात में मौजूद है लेकिन मध्य प्रदेश के जिला अलीराजपुर का हिस्सा माना जाता है। सीधे शब्दों में अगर कही जाए तो साजनपुर मौजूद है गुजरात राज्य में लेकिन सरकारी कागजातों में यह मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता है।

इस वजह से इस गांव के सभी कामकाज सरकारी रूप से मध्य प्रदेश सरकार और अलीराजपुर प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
क्या है इस गांव की खासियत?
- साजनपुर गांव की आबादी करीब 1200 लोगों की है।
- गांव के लोग आपस में तो गुजराती में बातचीत करते हैं लेकिन सरकारी कामकाज हिंदी में ही होती है। इसलिए हिंदी भी सीखी है।
- स्कूल में गुजराती नहीं बल्कि हिंदी में पढ़ाई होती है।
- यह गांव मध्य प्रदेश की सीमा से लगभग 3 किमी की दूरी पर मौजूद है।
- साजनपुर गांव के अधिकांश साइनबोर्ड हिंदी में ही लिखे मिलते हैं।
- अपने राज्य मध्य प्रदेश तक पहुंचने के लिए गांव के लोगों को गुजरात के सीमांचल इलाकों से होकर गुजरना पड़ता है।

- साजनपुर गांव के लोगों का नाम गुजरात नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के विधानसभा क्षेत्र में दर्ज है।
- जब गुजरात में चुनाव की घोषणा होती है तो साजनपुर एकलौता गांव होता है जो भौगोलिक रूप से गुजरात में होने के बावजूद बिल्कुल शांत रहता है।
- जब मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल फुंका जाता है तब गुजरात के इस गांव में भी राजनेताओं और उम्मीदवारों की चहल-पहल बढ़ जाती है।
क्यों है ऐसी अनोखी भौगोलिक अवस्था?
मिली जानकारी के अनुसार साजनपुर शुरू से ही अलीराजपुर का हिस्सा था, जिसपर राजपुतों का शासनकाल था। 1956 में जब अलीराजपुर का विलय भारत में हुआ और यह मध्य प्रदेश का हिस्सा बना तब या तो किसी कारणवश यह कागजातों में छिप गया या किसी ने जानबुझकर इसे कागजातों पर उभरने नहीं दिया। परिणामस्वरूप 1960 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि साजनपुर, अलीराजपुर जिले का ही हिस्सा बना रहेगा और इसपर मध्य प्रदेश का अधिकार होगा।
हालांकि खुद को मध्य प्रदेश का नागरिक कहलाने पर साजनपुर गांव के लोगों को कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में प्रशासन की तरफ से उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है और उन्हें मध्य प्रदेश सरकार या प्रशासन से कोई शिकायत नहीं है।



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