Moumita Bhattacharya       Nov 13, 2023

ग्वालियर किले में छिपे खजाने का राज

ग्वालियर के किले में बने तहखाने में छिपा कर रखा गया था खजाना जो सिर्फ एक पासवर्ड से खुलता। यह खजाना सिंधिया राजघराने का है, जिसकी राजधानी ग्वालियर थी।

ग्वालियर के किले में तहखाने में खजाने को एक कोड यानी बीजक से सुरक्षित रखा जाता था, जो एक राजा मरने से पहले अपने उत्तराधिकारी को बताता था।

लेकिन किसी कारणवश जयाजीराव सिंधिया यह बीजक या कोड अपने उत्तराधिकारी माधवराव सिंधिया को बताना भूल गये या नहीं बता पाए।

माधवराव सिंधिया ने पहले को किले में खजाना ढूंढने की कोशिश की लेकिन बीजक के बिना उसे ढूंढ निकालना असंभव था।

एक ज्योतिषी ने माधवराव से कहा कि वह उन्हें खजाने तक ले जा सकता है लेकिन उसकी एक शर्त है। माधवराव को खजाने तक ज्योतिषी के साथ अकेले जाना होगा।

माधवराव जब तहखाने के करीब थे, तब उन्हें किसी के पैरों की आहट सुनाई दी और उन्होंने अपने हाथों में पकड़ी भालानुमा छड़ी हवा में घुमा दी।

छड़ी ज्योतिषी के सिर पर लगी और वह वहीं ढेर हो गया। अकेले बाहर निकलने के लिए दिवार टटोल रहे माधवराव का हाथ एक खंभे से टकराया और तहखाने का दरवाजा खुल गया।

इस बात का जिक्र माधवराव सिंधिया की बहू विजयराजे सिंधिया ने अपनी आत्मकथा में भी किया है।  

कहा जाता है कि उस तहखाने से माधवराव सिंधिया को 40 लाख की मुद्राएं, 14720 हीरे, 37667 मोती, 11 हजार माणिक और करोड़ों के जवाहरात मिले थे।

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