Moumita Bhattacharya       Oct 20, 2023

क्यों मशहूर है मैसूर का दशहरा?

ना राम लीला होती है और ना ही रावण दहन फिर देशभर में इतना क्यों मशहूर है मैसूर का दशहरा?

मैसूर में दशहरा मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने के उपलक्ष्य में ही मनाया जाता है। यहां नवरात्रि के पहले दिन से ही उत्सव का आयोजन होता है।

10 दिनों तक देवी के विभिन्न रूपों की पूजा होती है जिसकी शुरुआत पहले दिन देवी चामुंडेश्वरी मंदिर में शाही परिवार द्वारा पूजा करने के साथ होती है।

इन 10 दिनों तक मैसूर पैलेस को दुल्हन की तरह सजाया जाता है जिसके लिए 1 लाख से अधिक बल्ब का इस्तेमाल किया जाता है।

स्थानीय भाषा में यहां दशहरा को नबाबबा या दसरा कहा जाता है।

मां चामुंडेश्वरी मंदिर से लेकर महल तक जुलूस निकाला जाता है, जिसमें लगभग 15 हाथी शामिल होते हैं।

जब आकर्षक रूप से सजे हाथियों का काफिला मैसूर पैलेस से निकलता है तो सबकी नजरें गजराज पर टिक जाती है, जिनकी पीठ पर सोने का हौदा रखा होता है।

करीब 750 किलो वजनी सोने के इस हौदे में बैठकर गजराज पर सवार होकर चामुंडेश्वरी देवी मैसूर नगर भ्रमण के लिए निकलती हैं।

इस साल दशहरा पर पटना में समाएगी पूरी दुनिया