राजस्थान के इस गांव में विसर्जित नहीं की जाती अस्थियां
मृत आत्मा की शांति के लिए लोग श्राद्ध पूजा और हवन-यज्ञ करवाने से पीछे नहीं हटते हैं। लेकिन राजस्थान में एक अनोखा गांव भी जहां मृतकों की अस्थियां नदी में विसर्जित नहीं की जाती है।
जी हां, इस गांव में ना तो मृतकों की अस्थियां विसर्जित होती है, ना ही कोई मंदिर या धार्मिक स्थल है और ना ही पूजा-पाठ होती है।
विश्वास करना मुश्किल है, पर यह गांव राजस्थान के चुरू जिले के तारानगर तहसील में 'लांबा की ढाणी' है।
70 साल पहले गांववालों ने मिलकर तय किया था कि मृतकों का अंतिम संस्कार तो किया जाएगा लेकिन उनकी अस्थियों को बहते पानी में प्रवाहित नहीं की जाएगी।
अस्थियों के बचे हुए अंश को जल में प्रवाहित करने के बजाए उन्हें फिर से जलाकर राख बना दिया जाता है।
इस गांव में सिर्फ 105 घर हैं और यहां रहने वाले लोग धर्म और कर्मकांड के बजाए मेहनत पर ज्यादा भरोसा करते हैं। और अंधविश्वास से कोसों दूर हैं।
इस गांव के रहने वाले लोग सेना, पुलिस, रेलवे और चिकित्सा के क्षेत्र में झंडे गाड़ चुके हैं।
गांव के 5 युवाओं ने खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीता है।