Moumita Bhattacharya       Aug 10, 2023

संत की बलि चढ़ी तब जाकर बनी 36 किमी लंबी किले की दीवार

वर्ष 1443 में कुंभलगढ़ के किले का निर्माण राणा कुंभा ने करवाना शुरू किया था। इस किले की खासियत इसकी 36 किमी लंबी दीवार है।

चीन की महान दीवार के बाद इसे एशिया की सबसे लंबी दीवार कहा जाता है। यह दीवार 15 मीटर चौड़ी है।

इस भव्य किले की दीवार से एक बड़ी ही रहस्यमयी कहानी जुड़ी हुई है।

कुंभलगढ़ का किला मेवाड़ के प्रसिद्ध महाराणा प्रताप का जन्मस्थान भी है। इसी वजह से यह किला काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

राणा कुंभा ने जब इस दीवार का निर्माण शुरू किया था, उस समय उन्हें काफी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था।

एक संत से जब राणा कुंभा ने अपनी परेशानियां बतायी तो संत ने कहा, "जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी बलि चढ़ाएगा, तभी दीवार का निर्माण आगे बढ़ेगा।"

यह सुनकर राणा कुम्भा चिंता में पड़ गये। तब एक अन्य संत सामने आए और वह अपनी कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गये।

संत ने कहा, "मैं पहाड़ी पर चलता जाऊंगा और पहाड़ी पर जहां रुकुंगा, वहीं मेरी बलि चढ़ा देना।"

संत ने वहीं किया। पहाड़ी पर वह जहां जाकर रुके, उसी जगह पर उन्हें मार दिया गया। इधर कुंभलगढ़ किले की दीवार का निर्माण भी पूरा हो गया।

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