राजस्थान की ऐतिहासिकता सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देशों के नागरिकों को भी आकर्षित करता है। राजधानी जयपुर में कई किलें हैं लेकिन उनमें से एक किला जिसे 'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है, अपनी कलात्मकता के साथ-साथ एक खास वजह से भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। राजस्थान का यह एकमात्र किला है जिसकी चोटी तक जाने के लिए आपको पैदल चलने की जरूरत नहीं होती है...

बल्कि वहां तक हाथी ले जा सकते हैं। अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि हम किस किले की बात कर रहे हैं। अभी तक नहीं समझे...! हम बात कर रहे हैं जयपुर के आमेर किले की। इस विश्व हाथी दिवस पर हम आपको आमेर किले में होने वाली हाथियों की सवारी के बारे में बता रहे हैं। गौरतलब है कि हर साल 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस (World Elephant Day) के तौर पर मनाया जाता है।

आमेर महल में हाथी की सवारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। सिर्फ इतना ही नहीं, हाथी की सवारी के कारण ही आमेर में रहने वाले कई परिवारों की रोजी-रोटी भी चलती है। अगर यह कहा जाए कि आमेर फोर्ट की रोनक नीचे गांवों से सुन्दर तरीके से सजाकर यहां लाये जाने वाले हाथियों की वजह से ही होती है, तो यह गलत नहीं होगा। लॉकडाउन के समय जब किले में हाथियों की सवारी बंद कर दी गयी थी, तब इन हाथियों के साथ-साथ इनको पालने वाले गांववाले भी दाने-दाने को मोहताज हो गये थे। लेकिन कोरोनाकाल के खत्म होने के बाद पुरातत्व विभाग ने पर्यटकों को फिर से हाथी की सवारी करवाने का आदेश जारी कर दिया।
किले को बनने में लगे पूरे 100 साल

आमेर के शानदार किले को बनने में पूरे 100 सालों का समय लग गया था। 16वीं शताब्दी के अंत में राजा मान सिंह ने इस किले का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। सवई जय सिंह द्वितीय और राजा जय सिंह प्रथम ने इस किले का निर्माण कार्य पूरा किया। सवई जय सिंह द्वितीय और राजा जय सिंह प्रथम के शासन काल में किले का निर्माण पूरा होने में 100 सालों का समय लग गया था। इस किले के मुख्य द्वार को सूर्य द्वार कहा जाता है। किले के अंदर सभी शासकों के चित्रों को सुन्दर तरीके से सजा कर रखा गया है।
बता दें, आमेर के किले की तुलना द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना से भी की जाती है। इसलिए इसे द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया कहा जाता है।
आमेर किले में हाथियों की शानदार सवारी

जयपुर आने वाला हर सैलानी आमेर किले का दीदार करने और यहां हाथियों की सवारी करने के लिए जरूर आते हैं। आमेर किले में कुल 96 हाथी हैं, जो पर्यटकों की सवारी के लिए नीचे गांव से सजाकर किले पर बने हाथी स्टैंड पर लाये जाते हैं। ये हाथी अपने महावत की हर बात और इशारे को समझते हैं। इन 96 हाथियों में से 50% को एक दिन छोड़कर सवारी के लिए लाया जाता है।
कितना किराया और कितना लगता समय
आमेर किले में हाथी सैलानियों को नीचे स्टैंड से किले के ऊपर तक ले जाते हैं। हाथी की सवारी के लिए निर्धारित शुल्क ₹1100 है। राजस्थान में आमेर का किला एकलौता ऐसा किला है जहां पर्यटकों को हाथी की सवारी करवायी जाती है। आमेर का किला पर्यटकों के लिए सुबह 9 बजे खोल दिया जाता है। शाम को 6 बजे किला बंद हो जाता है। सैलानी आमेर किले में हाथियों की सवारी का आनंद सुबह 9.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक ले सकते हैं।

पूरा आमेर किला घूमने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है। किले में पहुंचने के लिए आपको राजस्थान की राजधानी जयपुर आना होगा। जयपुर से यह किला करीब 11 किमी दूर है। देश के प्रमुख शहरों से जयपुर के लिए सीधी फ्लाईट्स मिल जाएंगी। जयपुर एयरपोर्ट से आमेर किले तक पहुंचने के लिए ऑटो, टैक्सी या कैब आसानी से मिल जाएंगे।



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