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बनारस से वाराणसी तक का सफर

आज ही के दिन बनारस को वाराणसी का नाम दिया गया था। साथ ही, इस जिले की पहचान के रूप में वरुणा और असि नदियों को भी शामिल किया गया था।
24 मई 1956 को बनारस वाराणसी बना, जो दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है।
ऐसे दो पवित्र नदियां वरुणा और असि होकर गुजरती हैं, जिसके नाम पर ही बनारस का नाम वाराणसी रखा गया।
बनारस का अस्सी घाट
यहां से दो पवित्र नदियां वरुणा और असि होकर गुजरती हैं, जिसके नाम पर ही बनारस का नाम वाराणसी रखा गया।
भगवान शिव की नगरी
वाराणसी को मंदिरों का शहर, भारत की धार्मिक राजस्थानी व भगवान शिव की नगरी के रूप में भी जाना जाता है। ब्रम्हा जी को छोड़कर यहां सभी भगवान के मंदिर स्थापित है।
इस शहर का इतिहास व अस्तित्व, इतिहास और परंपराओं से भी पुराना है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर भी यही स्थित है।
वाराणसी का तुलसी घाट
गोस्वामी तुलसीदास ने यहीं पर रामचरितमानस की रचना की थी। इसके अलावा सारनाथ में गौतम बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन दिया था।
बनारसी लस्सी
बनारसी कचौड़ी
यहां की कचौड़ी, लस्सी, ठंडई व बनारसी पान विश्व प्रसिद्ध है, जिसका स्वाद चखने के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं। इसके अलावा यहां की बनारसी साड़ी भी काफी फेमस है।
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