Ajay Mohan       Mar 13, 2023

प्राचीन नगरी काशी का समृद्ध इतिहास देश की शान है। उसी इतिहास के पन्‍नों से निकाल कर हम आपके लिए तीन रईसों की कहानियां लाये हैं।

नेटिव प्‍लैनेट सीरीज़ ----------------------------- "तस्वीरें आज की, कहानी कल की"

ये तीनों कहानियां ब्रिटिश शासन काल की हैं। आगे तस्वीरें वर्तमान की हैं शब्द इतिहास के।

झक्कड़ साव इतने रईस थे कि उनके घर के कई कमरे अशरफियों से भरे रहते थे।

1. झक्कड़ साव

एक बार उन्होंने नौकरों को अशरफियां धूप में सुखाने का आदेश दिया। नौकरों ने ईमानदारी से अशरफियां सुखायीं और वापस रख दीं।

एक भी अशरफी कम नहीं होने पर झक्कड़ साव को गुस्सा आ गया। बोले तुम लोग ठीक से काम नहीं करते हो।

जब नौकरों ने उनमें से कुछ अशरफियां चोरी कर लीं, तब उन्हें सुकून हुआ कि हां, चलो नौकरों ने काम तो किया।

2. भारतेंदु हरिश्‍चंद

भारतेंदु हरिश्‍चंद ने एक बार तीन दिन का अखंड कवि सम्मेलन का आयोजन किया और पूरा खर्च उठाया।

देश भर से कवियों के लिए खाने-पीने, रहने आदि का इंतजाम किया। यह देख कर काशी नरेश के मन में भी ईर्ष्‍या उत्पन्न हो गई थी।

बुढ़वा मंगल पर हर साल कार्यक्रम आयोजित करते थे, जिसमें हजारों रुपए के सोने-चांदी के वर्क उड़ जाते थे।

काशी के प्रसिद्ध रईस लल्लन छक्कन के क्या कहने, एक बार उन्हें बग्घी में घोड़े जोड़ने का शौक चढ़ा।

3. लल्लन छक्कन

उन्होंने बग्घी में इतने घोड़े लगवाये कि जिला प्रशासन ने उन पर जुर्माना ठोक दिया। लेकिन वो हार नहीं माने।

जुर्माना देते गए और घोड़े जोड़ते गए। अंत में जज भी तंग आ गये और उन पर केवल 1 पैसे का जुर्माना लगाया।

तब लल्लन छक्कन ने कहा, "क्या मेरी हस्ती एक पैसे की है" और हमेशा के लिए बग्घी पर बैठना छोड़ दिया।

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