आज हम आपको इसके पीछे की दिलचस्प वजह बताते हैं।
फुल स्पीड से दौड़ रही ट्रेन 110, 120 और कभी-कभी 130 किमी की रफ्तार से भी होती है। लेकिन स्टेशन से गुजरते समय लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को धीमी कर देते हैं।
तेज रफ्तार से चल रही ट्रेन अगर किसी नॉन-स्टॉप स्टेशन के ठीक बाद वाले स्टेशन पर रुकने वाली होती है, तो उसकी रफ्तार को धीरे-धीरे घटाना शुरू किया जाता है।
ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि आजकल हर ट्रेन में करीब 22-24 डिब्बे होते हैं। झटके से रुकने पर यात्रियों को चोट आ सकती है।