कृष्ण मंदिर या लक्ष्मी नारायण मंदिर शहर के बीच में स्थित है। महाराजा बीरेन्द्र किशोर माणिक्य द्वारा बनवाया गया यह मंदिर उज्जयंता महल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित है। अगरतला के अन्य पर्यटन स्थलों की तुलना में यहां सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं।
यहां के...
अगरतला से 100 किमी दूर स्थित पिलक एक छोटा सा कस्बा है। यहां पाए जाने वाले 7वीं व 8वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष के कारण इस शहर को प्रसिद्धि मिली है। इसके अलावा पिलक हिन्दू के साथ-साथ बौद्ध धर्म का भी तीर्थ स्थल है। पिलक दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया सब-डिविजन के...
शहर के बीच में स्थित सुकंता अकादमी एक चर्चित पर्यटन स्थल है। 1997 में बना यह अकादमी अगरतला का साइंस सेंटर है। अकामदी में गेम्स और रोचक गैलरी है, जो लोगों की वैज्ञानिक समझ विकसित करने में मदद करता है।
ताराघर सुकंता अकादमी का सबसे बड़ा आकर्षण है। छोटे से इस...
कॉलेज टीला अगरतला में शिक्षा का प्रमुख केन्द्र है। यहां का बीर बिक्रम कॉलेज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस कॉलेज की स्थापना 1947 में की गई थी और इसका नाम त्रिपुरा के राजा महाराजा बीर बिक्रम माणिक्य बहादुर के नाम पर रखा गया है। 254 एकड़ में फैले इस कॉलेज में हर...
अगरतला देश के बाहरी किनारे पर स्थित है। अखौरा बॉर्डर भारत और बांग्लादेश को अलग करता है। दोनों देशों के बीच की गतिविधियां यहीं से होती हैं। पड़ोसी देश से बड़ी संख्या में पर्यटक आखौरा बॉर्डर से ही भारत आते हैं।
आजादी और भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले अगरतला और...
अगर त्रिपुरा के उत्कृष्ट वास्तुशिल्पीय निर्माण की बात की जाए तो उसमें अगरतला के उज्जयंता महल का नाम सबसे पहले आएगा। फिलहाल इसका इस्तेमाल राज्य की विधानसभा के रूप में किया जा रहा है। इंडो-ग्रीक शैली के इस महल को महाराजा राधाकिशोर माणिक्य ने बनवाया था। 1899 से 1901...
मलांच निवास एक घर है, जहां 1919 में अगरतला भ्रमण के दौरान नोबल विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर ठहरे थे। त्रिपुरा के राजाओं के टैगोर के साथ संबंध काफी अच्छे थे। उन्हीं के निमंत्रण पर टैगोर ने कई बार अगरतला का भ्रमण किया था। 1919 में ऐसे ही एक भ्रमण के दौरान टैगोर कुंजाबन...
उज्जयंता महल के परिसर में बने कई मंदिरों में से उमामहेश्वर मंदिर भी एक है। यह एक हिंदू मंदिर है जो शिव व शक्ति परंपरा का अनुसरण कर रहा है। उमामहेश्वर दुर्गा का ही एक नाम है। त्रिपुरा के अन्य मंदिरों की तरह ही उमामहेश्वर मंदिर की बनावट भी बंगाली वास्तुशिल्पीय...
अगरतला से कुछ ही दूरी पर भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर स्थित कमलासागर एक खूबसूरत प्राकृतिक झील है। पौराणिक कथा के अनुसार कमलासागर झील की खुदाई त्रिपुरा के तत्कालीन शासक महाराजा धन्य माणिक्य के आदेश पर 15वीं शताब्दी में की गई थी। यह झील अगरतला से 30 किमी दूर है।
...त्रिपुरा के शाही परिवार का निवास स्थान नीरमहल की गिनती अगरतला के सबसे खूबसूरत महलों में होती है। इस महल को रुद्रसागर झील के ठीक बीच में 6 वर्ग किमी के भूभाग पर बनाया गया था। यह महल न सिर्फ खूबसूरती के लिए बल्कि इंजीनियरिंग कौशल के लिए भी जाना जाता है। नीरमहल का...
एचजीबी रोड पर स्थित त्रिपुरा स्टेट म्यूजियम की स्थापना 1970 में की गई थी। इस म्यूजियम में लगी प्रदर्शनियों में आप यहां के समृद्ध और गौरवशाली अतीत की झलक देख सकते हैं। यहां पत्थर पर उकेरी गई दुर्लभ चित्रों के अलावा मुद्राशास्त्रीय पुरालेख के प्रमाण उपलब्ध हैं, जो...
काफी बड़े क्षेत्र में फैला नेहरू पार्क अपने प्रकार का एकमात्र पार्क है। शहर के उत्तर में स्थित नेहरू पार्क का प्रबंधन और संचालन राज्य सरकार के हाथों में है। नेहरू पार्क कई तरह के पौधों, झाड़ियों और फूलों से अटा पड़ा है। यह पार्क उन कुछ गिने-चुने जगहों में से...
शहर के बीच में स्थित अगरतला सिटी सेंटर सबसे चहल-पहल वाला स्थान है। एक सुनियोजित शहर होने के नाते सिटी सेंटर का इलाका बेहद साफ सुथरा है। यहां सड़क के दोनों ओर क्रम में दुकानें लगी हुई हैं। चूंकि अगरतला पूर्वोत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, इसलिए यहां कई मल्टी...
अपनी हरियाली और विशाल भूभाग के लिए जाना जाने वाला सेपाहिजाला वन्य जीव अभ्यारण्य अगरतला सिटी सेंटर से 35 किमी दूर है। 18.5 वर्ग किमी में फैले इस अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी और जानवर पाए जाते हैं। इस वन्य जीव अभ्यारण्य की स्थापना 1972 में की गई थी और...
रोज वेली अम्यूजमेंट पार्क पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा और शानदार एम्यूजमेंट पार्क है। इसका विकास, प्रचार-प्रसार और रख रखाव रोज वेली ग्रुप ऑफ कंपनी द्वारा किया जाता है। यह पार्क अगरतला के अमताली में स्थित है।
अपने तरह का यह एकमात्र अम्यूजमेंट पार्क मौज...