अहमदाबाद शहर को 1411 ई. में बादशाह अहमद शाह के द्वारा स्थापित किया गया था और बाद में इसकी सुरक्षा उनके पोते महमूद बेगडा ने की थी। यह दीवार 10 किमी. की परिधि में बनी हुई है जिसमें 12 गेट, 189 गढ़ और 6000 से अधिक बैटलमैन बने हुए है।
शहर की ओर बढ़ने पर दीवार कम हो जाती है और साबरमती नदी तक इसका द्वार बना हुआ है। शाहपुर द्वार, दिल्ली द्वार, दरियापुर द्वार, प्रेम द्वार, कालूपुर द्वार, पंचकुवा द्वार, सारंगपुर द्वार, रायपुर द्वार, अस्तोडिया द्वार, महुदा द्वार, जमलपुर द्वार, खानजिया द्वार, रायखड़ द्वार, गणेश द्वार और राम द्वार इसके 12 द्वारों के नाम है। इन सभी द्वारों पर सुंदर सी नक्काशी है और इन पर सुलेख भी है।
दीवारों के भीतर स्थित शहर और दरवाजे, पुराने शहर का हिस्सा है जो बहुत संकीर्ण है और वहां तक केवल दो पहिया वाहन ही प्रवेश कर सकते है। यह पुराना शहर यूनिटों में बंटा हुआ है जिसे पोल कहा जाता है जहां एक समुदाय और सम्प्रदाय के लोग साथ - साथ रहते है। इनमें से कई पोल के निजी मंदिर भी है जो केंद्र में स्थित होते है, इस मंदिर की वास्तुकला बेहद सुंदर होती है, दरवाजों पर हुई नक्काशी भी खास दिखती है। यहां के खंभों पर फ्रेस्को काम हुआ है।
पोल में एक और प्रकार की संरचना, चबूतरों होती है जहां एक बर्ड फीडर बनाया जाता है ताकि चिडिया उस पर अपना घर बना सकें, इसे शहर में कटते पेड़ों के बदले में बनाया जाता है ताकि चिडियां अपना घोंसला आसानी से बना सकें।



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