मस्ज़िद बाबा दाउद खाकी का निर्माण 600 साल पहले हुआ था तथा जिसकी गणना सबसे पुरानी मस्जिदों में की जाती है। यह अनंतनाग के रेशी बाज़ार में खाकी शबन मोहला में स्थित है। इस मस्ज़िद का नाम हज़रत शेख बाबा दाउद खाकी के नाम पर पड़ा जो इस क्षेत्र के जाने माने विद्वान थे। उन्होंने हज़रत शेख हमजा मखदूम साहिब का अनुसरण किया और इस क्षेत्र के प्रमुख काज़ी माने गए।
हज़रत शेख बाबा दाउद खाकी इस क्षेत्र में इस्लाम को अलग करना चाहते थे और इस उद्देश्य के लिए उन्होंने अनंतनाग जिले में कई मस्जिदें बनाईं जिसमें मस्ज़िद बाबा दाउद खाकी भी शामिल है।
ऐसा कहा जाता है कि इरान से जब शाह हमदान इस मस्ज़िद में आए थे तब यह सिर्फ एक चबूतरा था। इस मंदिर की निचली मंजिल का निर्माण ईसा पश्चात 1397 में मेरे मुहम्मद हमदानी ने करवाया जो संत शाह हमदान के पुत्र थे। इसके बाद बाबा दाउद खाकी ने इस मस्ज़िद की दूसरी और तीसरी मंजिल का निर्माण क्रमशः 1579 और 1582 में करवाया। अनंतनाग में लगभग 10 साल गुजारने के बाद संत खाकी ने ईसा पश्चात 1587 में अंतिम साँस ली।



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