यह शहर पश्चिम बंगाल के उत्तर में बसे शहरों में से एक है जहां पर्यटकों को आना खासा पसंद है। इस स्थल पर जहां एक ओर चाय के हरे - भरे बागान है वहीं दूसरी ओर बर्फ से ढ़की हिमालय की चोटियां है। यह स्थान पर्यटकों और हनीमून बनाने वालों के लिए खास स्थान है जहां वह आराम से अपनी छुट्टियां बिता सकते है। बागडोगरा, दार्जिलिंग के पास में ही स्थित है। यहां से सिलीगुडी और सिक्किम भी ज्यादा दूर नहीं है। एक सुंदर राज्य में यह सबसे खूबसूरत उत्तरी शहर है।
बागडोगरा की स्थानीय संस्कृति
अगर आप बागडोरा की स्थानीय जनसंख्या पर ध्यान दें तो पाएंगे कि वहां के अधिकांश: लोग बौद्ध संस्कृति से प्रभावित है। यह स्थल बेहद शांत स्थान है। यहां दुर्गा पूजा और काली पूजा के साथ - साथ बौद्ध धर्म के भी उत्सव और परंपराओं को भी निभाया जाता है। यह सभी परम्पराएं यहां की संस्कृति को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाती है।
बागडोगरा और उसके आसपास स्थित पर्यटक स्थल
बागडोगरा में पहले स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मुम्बई और दिल्ली जैसे स्थानों तक आसानी से पहुंचा जा सकता था या वहां से आया जा सकता था। यहां पास में ही तीस्ता नदी बहती है जो वाकई में मन को लुभाने वाले दृश्य प्रदान करती है। बागडोगरा में आप ज्यादा कुछ कर नहीं सकते लेकिन जो लोग शांति से छुट्टियां बिताना चाहते है वह यहां अच्छा वक्त व्यतीत कर सकते है। यहां के प्रमुख आकर्षणों में सेवोकेश्वरी काली मंदिर और सालूगारा मठ शामिल है।
बागडोगरा तक कैसे पहुंचे
बागडोगरा तक स्थानीय बसें और प्राईवेट कार आसानी से पहंचा देती है। इनकी यात्रा से पहले किराया अवश्य तय कर लें। अगर आप समयबद्ध है तो सिक्किम और दार्जिलिंग के किसी होटल में भी रूककर यहां की एक दिन की यात्रा पर आ सकते है। यहां के होटल काफी अच्छे होते है और वहां अच्छा समय बिताया जा सकता है।



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