त्रिवेतीनाथ मन्दिर, भगवान शिव को समर्पित चार प्राचीन मन्दिरों में से एक है। यह बरेली शहर के बाहरी हिस्से में स्थित है। भगवान शिव को त्रिवेतीनाथ भी कहते हैं। लोककथाओं के अनुसार, भगवान शिव या त्रिवेतीनाथ ने भविष्यवाणी की कि वे पाँचाल क्षेत्र के घने जंगलों में स्थित तीन वट वृक्षों के नीचे सोये गड़रिये के सपनों में प्रकट होंगें।
भविष्यवाणी के अनुसार वटवृक्षों के नीचे सोये गड़रिये ने सपने में भगवान शिव को देखा। जब वह जागा तो उसने वृक्षों की जड़ों के पास शिवलिंग को पड़ा पाया। यह घटना हिन्दू कैलेन्डर के अनुसार विक्रमी संवत 1474 में हुई। यह समय प्राकट्य दिवस या बाबा त्रिवेतीनाथ भगवान के लिंग के रूप में उत्पन्न होने के समय से मेल खाता है।
ऐसी मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रृद्धा के साथ श्री त्रिवेतीनाथ की पूजा करते हैं उनकी सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं। इसलिये मन्दिर पर प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ आती है।



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