यात्रियों को राउजा अवश्य घूमना चाहिए क्योकि यहां इब्राहिम आदिलशाह द्धितीय और उनकी बेगम ताज सुल्ताना रहती थी। इस इमारत की डि़जाइन मलिक सन्दाल नें बनाई थी जोकि ड़ेक्कन के ताजमहल के रूप में प्रसिद्ध है। मलिक सन्दाल के इस डि़जायन में दायीं तरफ मस्जिद है, बायीं तरफ गुम्बद है और चार मीनारें है।
वहॅा एक आयताकार, पॉच मेहराब के साथ मस्जिद में प्रार्थना कक्ष है। उच्च कोनों पर स्थित मेहराब, तल पर स्थित स्तम्भों के साथ मिलकर मंजिलों को विभाजित करती है। गुंबद क्षेत्र, आकार में मंच पर सजी हुई पंखुडी के समान सा प्रतीत होता है।
मकबरा और मस्जिद दोंनो ही समान रूप से खूबसूरत बगीचे के बीचों-बीच में खड़े हुऐ है। ऐहोल में यह सबसे खूबसूरत कलाकृति है और पूरी दुनिया से लोग इस खूबसूरत नमूने को देखने आते है। इसका प्रवेश शुल्क, प्रत्येक भारतीय नागरिक,सार्क सदस्य देशों के लिए मात्र 5 रू है जबकि अन्य देशों के लिए 2 अमेरिकन डॅालर यानि 100 रू है।



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