मालिक-ए- मैदान यानि युद्धक्षेत्र का भगवान बीरजापुर में शेरशाह बुर्ज के उच्च क्षेत्र में स्थित मालिक-ए- मैदान का निर्माण 1549 में मुहम्मद आदिल शाह प्रथम ने करवाया था जिसमें काफी बड़ी-बड़ी तोपों को रखा गया था। बीजापुर शहर के बाहरी क्षेत्र में पश्चिमी दिशा में 3 किमी की दूरी पर यह स्थित है।
यह क्षेत्र व तोपें, प्राचीनकाल में होने वाले बड़े-बड़े युद्धों की सच्चाई बॅया करते हैं। इस काल के हथियारों के सिरे,इस प्रकार डि़जाइन किए गए हैं जैसे शेर अपना जबड़ा खोले हुऐ हो। इसमें एक छोटे हाथी को दो शेरों द्वारा नुकीले दातों से फाड़कर मारते हुएडि़जाइन भी बना है।
वहॅा भी एक तोप के शीर्ष पर औरंगजेब द्वारा शिलालेख बनवाई गई थी। यहॅा एक पौराणिक तोप 55 टन भारी व ड़ेढ मीटर व्यास की है और इसकी लम्बाई 4.45 मीटर की है। इस तोप की विशेषता यह है कि धधकते सूरज की गर्मी में भी यह शांत रहती है और जब इसका उपयोग किया जाता है तो यह सिर्फ एक घंटी की तरह धीरे से आवाज करती है।



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