वाल्मीकि आश्रम, वह स्थल है जहां ऋषि वाल्मीकि ने बैठकर महाकाव्य रामायण की रचना की थी। यही वह स्थल है जहां माता सीता ने अपने निर्वासन के दिनों में शरण ली थी और अपने जुडवां पुत्रों लव व कुश को जन्म दिया था। इसी स्थान पर रहकर महान ऋषि ने लव व कुश को युद्ध नीतियां, तरीके और राजनीति की पाठ सिखाया था, यहीं उन दोनों जुड़वा भाईयों का बचपन बीता था।
यह आश्रम थोड़ी ऊंचाई पर स्थित है और यहां तक पहुंचने के लिए सीढि़यों को चढ़ना पड़ता है। इन सीढियों को स्वर्ग की सीढियां कहा जाता है। आश्रम से आप चिडियों को निहार सकते है, यहां के शांत वातावरण को महसूस कर सकते है और एक विंहगम दृश्य का आनंद उठा सकते है।



Click it and Unblock the Notifications