दूधपत्थर, घने जंगल, पहाड़ों, और एक धारा के बीच स्थित खूबसुरत साइट है। किवदंती है कि बहुत पहले एक कश्मीरी ऋषि नुंद रेशी भम्रण कर रहे थें, उनको प्यास लगी। इसलिए उन्होने इसी जगह एक गढ्ढा किया जिसमें से दूध की धारा निकल आई।
इस स्थल का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है दूध और पत्थर। यहां पास में ही अन्य आकर्षक स्थल भी है जहां पर्यटक जा सकते।



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