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होम » स्थल » बूंदी » आकर्षण
  • 01फूल सागर

    फूल सागर

    फूल सागर एक योजनाबद्ध तरीके से बनाई गई संरचना है जो बूंदी के पश्चिम में स्थित है। महाराजा बहादुर सिंह ने 1945 में इसके निर्माण की शुरुआत की थी; हालांकि यह कभी पूरा नहीं हो पाया। यह महल अभी भी अधूरी अवस्था में है और पर्यटकों के लिए खुला नहीं है।

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  • 02गढ़ महल

    गढ़ महल को बूंदी महल भी कहा जाता है। इस पर राव बलवंत सिंह का अधिकार था। गढ़ महल में चित्रशाला ही एक ऐसा हिस्सा है जो आम जनता के लिए खोला गया है। इस महल को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक देखा जा सकता है।

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  • 03नवल सागर झील

    नवल सागर झील

    नवल सागर मनुष्य द्वारा निर्मित झील है जो बूंदी के मध्य में स्थित है। यह झील तारागढ़ किले से साफ़ दिखाई देती है। इस झील के शांत पानी में पूरी बूंदी की परछाई देखी जा सकती है। यह झील वर्गाकार है और इसमें भगवान् वरुण का एक छोटा सा मंदिर है। इस मंदिर का कुछ हिसा झील के...

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  • 04शिकार बुर्ज

    शिकार बुर्ज

    शिकार बुर्ज सुखमहल से ज्यादा दूर नहीं है जो शहर के चितकबरे जंगलों में स्थित है। यह एक पुराना शिकारी मकान है जो बूंदी के शासकों के आधीन था। उम्मेद सिंह, बूंदी के 18 वीं सदी के शासक सिंहासन छोड़ने के बाद यहां रहते थे। शिकार बुर्ज को अब एक पिकनिक स्थल में बदल दिया...

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  • 05केशव राय पाटन

    केशव राय पाटन

    केशव राय पाटन बूंदी से 45 किमी की दूरी पर स्थित है जिले के पुराने शहरों में से एक है। यहाँ एक मंदिर है जो भगवान् विष्णु को समर्पित है। यह मंदिर बूंदी शैली की वास्तुकला में बनाया गया है। इसे 1601 ई. में बूंदी के महाराजा शत्रुसाल द्वारा बनवाया गया था।

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  • 06मोती महल

    मोती महल किले का एक शाही भवन है जिसमें एक भव्य छत है। इस छत को कांच के काम से सजाया गया है। इस सुंदर महल के निर्माण में कुछ चयनित पत्थर और 80 पाउंड सोने का इस्तेमाल हुआ है।

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  • 07फूल सागर झील

    फूल सागर झील

    फूल सागर झील फूल महल परिसर में स्थित है जो बूंदी के पश्चिमी भाग में है। सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षी की बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं। इस कारण प्रत्येक वर्ष नवंबर से फरवरी के दौरान इस झील को देखने बड़ी संख्या में लोग यहाँ आते हैं।

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  • 08धाभाई कुंड

    धाभाई कुंड

    धाभाई कुंड अपने सुंदर ज्यामितीय निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण सोलहवीं शताब्दी में हुआ था और यह रानीजी-की-बावडी के पास स्थित है। यह एक सीढ़ीदार कुआँ है जिसका निर्माण राजस्थान के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को पानी देने के लिए हुआ था। यह अपनी सुंदर नक्काशी और...

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  • 09छत्र महल

    छत्र महल

    छत्र महल 1660 में छतर साल द्वारा बनवाया गया था और यह राजपूतों के शासनकाल का मजबूत सबूत है जो उस समय बनवाया गया था जब भारत पर मुगलों का शासन था। मुग़ल स्मारक बनाने के लिए लाल बलुआ पत्थरों का प्रोग करते थे जबकि छतर साल ने इस महल को बूंदी की खदानों से प्राप्त पत्थरों...

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  • 10नगर सागर कुंड

    नगर सागर कुंड

    नगर सागर कुंड में दो जुड़वां सीढ़ीदार कुँए हैं जो चौहान दरवाज़े के बाहर स्थित हैं। इसका निर्माण बूंदी के लोगों के लिए सूखे के दौरान पानी के लिए कराया गया था। यह अपने चिनाई के काम के लिए प्रसिद्ध है।

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  • 11सुख महल

    सुख महल

    सुख महल जैत सागर के किनारे पर स्थित है और इसका निर्माण उम्मेद सिंह द्वारा करवाया गया था। यह रूडयार्ड किपलिंग का निवास स्थान था और प्रसिद्ध किताब “किम” को लिखने की प्रेरणा उन्हें यहीं से मिली थी। अब यहाँ पर कृषि विभाग का विश्राम गृह है। सुख महल की दूसरी...

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  • 12इंद्रगढ़ किला

    इंद्रगढ़ किला इंद्रसाल सिंह हाडा ने सत्रहवीं शताब्दी में बनवाया था जो बूंदी से 77 किमी की दूरी पर स्थित है। यह किला एक पहाड़ के पास स्थित है जिसमें एक अनोखी संरचना है जिसमें चार दरवाजों के साथ एक भारी दीवार है। इस सुंदर किले के भीतर तीन महल हैं- जहाना महल, सुपारी...

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  • 13सीढ़ीदार कुएं

    सीढ़ीदार कुएं

    सीढ़ीदार कुएं जो बावडी के नाम से जाने जाते हैं बूंदी में बहुत प्रसिद्ध हैं। पर्यटकों को इन्हें देखने एक बार अवश्य जाना चाहिए। जब गर्मियों में पीने के पानी की कमी हो जाती है तो ये बावड़ियाँ पानी के स्त्रोत का काम करती हैं। बूंदी में लगभग पचास सीढ़ीदार कुएं थे...

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  • 14भोरजी का कुंड

    भोरजी का कुंड

    भोरजी का कुंड एक प्रसिद्ध सीढ़ीदार कुआं है जिसका निर्माण सोलहवीं शताब्दी के दौरान हुआ था। कुंड का अर्थ है तालाब। बावड़ियाँ (सीढ़ीदार कुँए) बूंदी में गर्मियों के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी के स्त्रोत की तरह काम करती हैं। भोरजी का कुंड मानसून के मौसम में...

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  • 15केदारेश्वर धाम

    केदारेश्वर धाम

    केदारेश्वर धाम गंगा नदी के किनारे स्थित है। यह एक पवित्र स्थल है जिसका निर्माण बम्बवडा के राव राजा कोल्हान द्वारा कराया गया था। दो प्रसिद्ध मंदिर केदारेश्वर और बद्री नारायण इस धाम से बहुत दूर नहीं हैं।

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