हालांकि चंबल अभयारण्य घड़ियाल, दुर्लभ डॉल्फिन और ऐलगेटर के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद यहां अलग-अलग पक्षियों को देखने का लुत्फ उठाया जा सकता है। चंबल नदी विंध्य पहाड़ से निकलती है और राजस्थान के कोटा जिले, मध्यप्रदेश के मुरैना व भिंड जिले और उत्तरप्रदेश के आगरा...
विलेज सफारी के जरिए आप चंबल अभयारण्य के आसपास के गांवों में घूम सकते हैं। इन गांवो में घूम कर आप ग्रामीण भारत के जन-जीवन को करीब से महसूस कर सकते हैं। गांवों का भ्रमण के दौरान आप कुम्हारों को मिट्टी के बर्तन, कुल्लड़ और अन्य परंपरागत चीजें बनाते हुए देख सकते...
चंबल अभयारण्य में कई तरह से घूमा जा सकता है। केमल सफारी तो एक विकल्प है ही, साथ ही जीप सफारी के जरिए भी आप चंबल अभ्यारण्य के रोमांच से रू-ब-रू हो सकते हैं। जीप सफारी के जरिए आप घुमावदार पगडंडियों, ऊंची-नीची घाटियों, नदी के किनारे, छोटी-छोटी झाड़ियों, गांवों और...
कैमल सफारी के जरिए आप चंबल अभयारण्य को और करीब से देख सकते हैं। इसके जरिए आप जंगल की पगडंडी और रास्तों पर नदी के किनारे-किनारे, घटियों, गावों और आतेर किला होते हुए दूर तक निकल सकते हैं। नदी के किनारे कैमल सफारी करते समय आप संकटग्रस्त घड़ियाल और ऐलगेटर को देख सकते...
चंबल अभयारण्य घूमना रोमांचक अनुभव साबित हो सकता है। इसकी प्रसाशन व्यवस्था तीन राज्य उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के हाथों में है। 1979 में स्थापित इस अभयारण्य के कोर क्षेत्र में 400 किमी लंबी चंबल नदी आती है। साथ ही यह चंबल नदी के आसपास 1235 स्क्वायर किमी...
चंबल अभयारण्य में जानवर और पक्षियों को देखने के अलावा आप यमुना नदी पर बने बातेश्वर मंदिर भी घूम सकते हैं। मंदिर परिसर के अंदर करीब 100 से ज्यादा मंदिर हैं, जो भगवान शिव को समर्पित हैं। ऐसा माना जाता है कि बातेश्वर भगवान कृष्ण का जन्म स्थान है, इसलिए इससे कई...
नौकाओं के जरिए चंबल अभयारण्य को और करीब से देखा जा सकता है। चंबल नदी में रीवर सफारी के जरिए आप वन्यजीव को करीब से देखने का लुत्फ उठा सकते हैं। नौका चालक बेहद अनुभवी होते हैं और वह जानवर व पक्षियों के काफी करीब से नौका लेकर जाते हैं। रीवर सफारी के दौरान प्रकृतिविद्...