हालांकि चंबल अभयारण्य घड़ियाल, दुर्लभ डॉल्फिन और ऐलगेटर के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद यहां अलग-अलग पक्षियों को देखने का लुत्फ उठाया जा सकता है। चंबल नदी विंध्य पहाड़ से निकलती है और राजस्थान के कोटा जिले, मध्यप्रदेश के मुरैना व भिंड जिले और उत्तरप्रदेश के आगरा व इटावा जिले से होती हुई अंत में यमुना नदी में मिल जाती है।
चंबल अभयारण्य महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र आईएन122 के रूप में सूचिबद्ध है। यहां स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की 330 से भी ज्यादा प्रजाति पाई जाती है। फिलहाल यह जगह भारत में बर्डिग के विकल्प के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।
पतछड़ और ठंड का मौसम पक्षियों को देखने का सबसे अच्छा समय होता है। इस महीने में यहां स्थानीय पक्षियों के अलावा आप हिमालय की ऊंचाइयों और पालेआर्कटिक क्षेत्र से आने वाले प्रवासी पक्षियों को भी देख सकते हैं। इस अभयारण्य में आप भारतीय स्किमर और सफेट पुट्ठे वाले गिद्ध, भारतीय गिद्ध और स्पॉट डॉटेड ईगल को भी देखने का आनंद उठा सकते हैं।



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