पूरे भारत में चर्चित वाडापलानी मंदिर एक प्रचीन हिंदू मंदिर है। इस मंदिर को 17वीं शताब्दी के अंत में अन्नासम्य नेकर ने बनवाया था, जो कि भगवान मुरुगन का एक समर्पित अनुयायी था। नैकर काफी गरीब था। उन्होंने एक झोपड़ी बनवाई और उसमें भगवान मुरुगन की तस्वीर रख दी। वह हर दिन उसकी पूजा करता था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार जब नैकर प्रार्थना कर रहा था तो उन्हें ईश्वरीय हस्तक्षेप की अनुभूति हुई। इसके बाद उन्होंने तिरुथानी का भ्रमण किया और बालीपीता में उन्होंने अपने जीभ का बलिदान दे दिया। वापस आने पर उन्होंने अपने एक घनिष्ठ मित्र से मदद की गुहार लगाई। उनके समर्पण से प्रभावित होकर लोगों ने झोपड़ी पर चढ़ावा चढ़ाना शुरू कर दिया। जल्द ही यह झोपड़ी एक छोटा तीर्थ स्थल में तब्दील हो गया। श्रद्धालुओं के कारण के ही बाद में यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बन गया।
आज यह मंदिर एक बड़े भूभाग पर बना हुआ है। मंदिर के परिसर में एक तीर्थम भी है। ऐसा कहा जाता है कि तीर्थम के पानी में बीमारी दूर करने की चमत्कारिक शक्ति है।



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