यदि समय मिलें तो पर्यटकों को पहाड़ी की तलहटी में स्थित नमदा चिलुमे(चिलुमे अर्थात् चश्मा) देखने का सुझाव दिया जाता है। नमदा चिलुमे को जयमंगली नदी का उत्पत्ति स्थान माना जाता है। प्रसिद्ध लोककथाओं के अनुसार भगवान राम लंका जाते समय यहाँ पर रुके थे। भगवान राम को...
यदि समय मिलें तो पर्यटक संजीवार्या मंदिर भी देख सकते हैं जो भगवान हनुमान को समर्पित है। इस मंदिर में पहुँचने पर आप देखेंगे कि भगवान हनुमान की मूर्ति खड़ी मुद्रा में है और हाथ जुड़े हुए हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, संजीवार्या मंदिर लक्ष्मी नरसिंह मंदिर से पहले...
देवआर्यनदुर्ग गाँव की यात्रा करते हुए पर्यटकों को पहाड़ी की चोटी पर स्थित योगनरसिंह स्वामी मंदिर ज़रूर आना चाहिए। लोकप्रिय लोककथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा(ब्रह्मांड के निर्माता) ने इस तीर्थस्थल को बनाया था। यह वह स्थान है जहाँ भगवान ब्रह्मा की 1000साल लंबी तपस्या...
देवआर्यनदुर्ग गाँव की यात्रा के लिए आने पर पर्यटकों को भोगनरसिंह स्वामी मंदिर भी ज़रूर आना चाहिए जो पहाड़ी की तलहटी में स्थित है। यह तीर्थस्थल चोल शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। यहाँ पहुँचने पर यात्री देवी लक्ष्मी की मूर्ति देख सकते हैं। स्थानीय मान्यताओं के...
देवआर्यनदुर्ग की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों को गोरावनहल्ली में स्थित महालक्ष्मी मंदिर देखने का सुझाव दिया जाता है। लोकप्रिय लोककथा के अनुसार इष्टदेव, देवी महालक्ष्मी की प्रतिमा स्वयं उत्पन्न हुई थी। मंदिर में पहुँचने पर भक्तजनों को अन्य देवताओं जैसे नागदेव और...