रुक्मिणी देवी मंदिर द्वारकाधीश मंदिर से 2 किमी. की दूरी पर स्थित है जिसके बाहरी ओर गजतारस (हाथी) और नाराथारस (मानव मूर्तियाँ) की नक्काशी की गई है। एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार यह मंदिर भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को समर्पित है तथा यह निम्न कारण से मुख्य मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित है – एक बार भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मिणी दुर्वासा ऋषि को द्वारका आमंत्रित करने के लिए गए।
दुर्वासा ने भगवान तथा उनकी पत्नी स्वयं अपने कन्धों पर रथ उठाकर उन्हें वहां ले जाएँ। दंपत्ति खुशी खुशी इसके लिए तैयार हो गए और उन्होंने चलना शुरू किया। रास्ते में रुक्मिणी को प्यास लगी और गंगा का पवित्र पानी प्राप्त करने के लिए कृष्ण ने धरती पर लाठी मारी।
परन्तु दुर्वासा ऋषि को पानी की पेशकश किये बिना ही रुक्मिणी ने पानी पी लिए जिसके कारण दुर्वासा ऋषि को क्रोध आ गया और उन्होंने रुक्मिणी को शाप दिया कि वह अपने पति से बिछुड़ जाएगी। इसलिए दोनों मंदिरों के बीच कुछ दूरी है।



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