भगवान कार्तिक को समर्पित अचलेश्वर मन्दिर गुरूद्वारा क्षी अचल साहिब के दूसरी ओर स्थित है। यह नाम कार्तिकेय से लिया गया है जिसका अर्थ होता है, खुशी और शक्ति के प्रदाता। वे देवी पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं और मुरुगन के नाम से भी जाने जाते हैं। परिसर में स्थित एक बोर्ड के अनुसार यह मन्दिर सतयुग कालीन है। इस धार्मिक स्थल पर हर साल हजारों भक्त एवं पर्यटक आते हैं जिन्हें यहाँ का शाँन्त वातावरण पसन्द आता है।



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