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होम » स्थल » गुरदासपुर » आकर्षण
  • 01तख्त-ए-अकबरी

    तख्त-ए-अकबरी

    जैसा कि नाम से प्रतीत होता है तख्त-ए-अकबरी वही स्थान है जहाँ पर पिता की मृत्यु के बाद अकबर का राज्याभिषेक हुआ था। यह समारोह 14 फरवरी 1556 को हुआ था जब अकबर 13 साल के थे। पिता की मृत्यु के समय अकबर के साथ उनके गुरू बैरम खाँ मौजूद थे। वे गुरदासपुर जिले के कालनौर में...

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  • 02थाडा साहिब

    थाडा साहिब

    थाडा साहिब ही वह स्थान है जहाँ 1515 में उडासी या अपने पहले प्रवचन से लौटने के बाद श्री गुरू नानक देव जी ने बाबा अजीत रंधावा के कुछ महत्वपूर्ण विचार विमर्श किया था।

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  • 03गुरूद्वारा थेह गढ़ी बाबा बन्दा सिंह बहादुर

    गुरूद्वारा थेह गढ़ी बाबा बन्दा सिंह बहादुर

    गुरूद्वारा थेह गढ़ी बाबा बन्दा सिंह बहादुर, जिसे गुरूद्वारा भाई धुनी चन्द हवेली के नाम से भी जाना जाता है, गुरदासपुर के पश्चिम में 7 किमी की दूरी पर स्थित है। इस गुरूद्वारे को मुगलों के खिलाफ युद्ध में शहीद हुये सिक्खों के सम्मान में बनवाया गया था।

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  • 04गुरूद्वारा श्री दरबार साहिब

    गुरूद्वारा श्री दरबार साहिब

    गुरूद्वारा श्री दरबार साहिब गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक में स्थित है। इसे प्रथम सिक्ख गुरू श्री गुरू नानक देव जी के याद में बनाया गया था। ऐसा माना जाता है कि 1515 में अपने पहले प्रवचन या उडासी से लौटने के बाद श्री गुरूनानक देव जी यहाँ आये थे। गुरूजी अपने परिवार...

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  • 05कबूतरी दरवाजा

    कबूतरी दरवाजा

    कबूतरी दरवाजा पुराने गुरदासपुर बाज़ार का भाग है। यह स्थान अपने कई स्वादिष्ट पकावानों के लिये जाना जाता है जिसमें मिठाइयाँ भी शामिल हैं। पर्यटक यहाँ तक टैक्सियों और ऑटो-रिक्शा द्वारा आसानी से पहुँच सकते हैं।

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  • 06गुरदास नंगल

    गुरदास नंगल

    गुरदासपुर से 6 किमी की दूरी पर स्थित गुरदास नंगल एक पुराना गाँव है। यह स्थान बंदा सिंह बहादुर और मुगलों के बीच आखिरी युद्ध से जुड़ा हुआ है। गुरदास नंगल विशाल दीवारों से घिरा है जहाँ सिक्खों से शरण ली थी। इस स्थान तक टैक्सियों, बसों और ऑटोरिक्शा द्वारा आसानी से...

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  • 07मछली पार्क

    मछली पार्क

    मछली पार्क गुरदासपुर के मुख्य शहर में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। पहले इसका उपयोग मछलियों के चारे के भण्डार के रूप में किया जाता था। पार्क के बीच में स्थित एक मछली की बड़ी मूर्ति के कारण इस स्थान को मछली पार्क कहा जाता है। यह स्थान टहलने और आराम करने के लिये...

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  • 08महाकालेश्वर मन्दिर

    महाकालेश्वर मन्दिर एक अनोखा धार्मिक आकर्षण है क्योंकि यह भारत का अकेला शिव मन्दिर है जहाँ का शिवलिंग लेटा हुआ है। यह मन्दिर गुरदासपुर से 23 किमी की दूरी पर स्थित कालनौर कस्बे में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे दिल से आने वाले भक्तों की मनोकामनाओं को भगवान शिव...

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  • 09सारजी साहिब

    सारजी साहिब

    पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित सारजी साहिब में बाबा अजीत रंधावा का कुँआ बनाया गया था जो अब बावली की तरह है। ऐसा माना जाता है कि गुरूनानक देव जी सारजी साहिब में साधना किया करते थे और इस कुँएं के पास अपने अनुयायियों को प्रवचन देते थे। इसी स्थान पर बाबा अजीत...

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  • 10श्री नामदेव दरबार

    श्री नामदेव दरबार

    श्री हरगोविन्दपुर से 10 किमी की दूरी पर स्थित घोमान में श्री नामदेव दरबार स्थित है। यह धार्मिक स्थान बाबा नामदेव से जुड़ा है जिन्हें इस स्थान का संस्थापक माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार उन्होंने यहाँ पर 17 वर्षों तक साधना की।

    गुरू नामदेव जी अपने चमत्कारी...

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  • 11अचलेश्वर मन्दिर

    अचलेश्वर मन्दिर

    भगवान कार्तिक को समर्पित अचलेश्वर मन्दिर गुरूद्वारा क्षी अचल साहिब के दूसरी ओर स्थित है। यह नाम कार्तिकेय से लिया गया है जिसका अर्थ होता है, खुशी और शक्ति के प्रदाता। वे देवी पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं और मुरुगन के नाम से भी जाने जाते हैं। परिसर में स्थित...

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  • 12गुरूद्वारा चोला साहिब

    गुरूद्वारा चोला साहिब

    गुरदासपुर से 36 किमी की दूरी पर डेरा बाबा नानक में स्थित गुरूद्वारा चोला साहिब को श्री गुरू नानक देव जी की याद में बनवाया गया था जिन्होंनें यहाँ 12 वर्ष बिताये थे। गरुद्वारे के अन्दर बालख बुखारा (बगदाद) से बाबा काबली मल जी द्वारा लाये गये गुरूनानक जी के कपड़े...

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  • 13डेरा बाबा नानक

    डेरा बाबा नानक

    रथम सिक्ख गुरू श्री गुरू नानक देव जी का याद में बनाया गया डेरा बाबा नानक गुरदासपुर के पश्चिम में 45 किमी की दूरी पर है। ऐसा माना जाता है कि वे यहाँ 12 साल तक रहे। मक्का जाने पर उनको दिये गये कपड़े यहाँ संरक्षित हैं। माघी के अवसर पर जनवरी के दूसरे सप्ताह में यहाँ...

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