चौमहला महल का संबंध हैदराबाद के निजाम से है और यह आसिफ जाही का आधिकारिक निवास स्थान था। इस महल का नाम फारसी शब्द चहार और महालात पर पड़ा है, जिसका अर्थ होता है चार महलें। यह महल ईरान के शाह महलों की तर्ज पर बनाया गया है। इसका निर्माण कार्य 18वीं शताब्दी में शुरू हुआ था और इसे बनाने में करीब 10 साल का समय लगा। इसी लिए इस महल के वास्तुशिल्प और डिजाइन में कई शैली का प्रभाव नजर आता है।
पुराने समय में इस महल का इस्तेमाल निजामों के अभिषेक और गवर्नर जेनरल के स्वागत समारोह के साथ अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता था। वास्तव में निजाम के शासन काल में सभी अभिषेक समारों चौमहला महल में ही आयोजित किए जाते थे। महल में दो प्रांगण उत्तर और दक्षिण की दिशा में है। दोनों की प्रांगण उत्कृष्ट डिजाइन से बने कमरों से घिरे हुए हैं। महल की भव्यता और सुंदरता इसकी सबसे बड़ी खासियत है।



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