गोलकुंडा किला हैदराबाद से सिर्फ 11 किमी दूर है। 15वीं शताब्दी में गोलकुंडा चकाचौंध भरी जिंदगी जी रहा था। हालांकि अब यहां सिर्फ गौरवशाली अतीत के खंडहर ही देखने को मिलते हैं। इस किले को कुतुब शाही वंश के शासकों ने बनवाया था, जिन्होंने यहां 1512 से शासन किया।
किले में सबसे ज्यादा योगदान इब्राहिम कुली कुतुब शाह वली ने दिया। इस किले को उत्तरी छोर से मुगलों के आक्रमण से बचने के लिए बनाया गया था। अकॉस्टिक इस किले की सबसे बड़ी खासियत है। अगर आप महल के आंगन में खड़े होकर ताली बजाएंगे तो इसे महल के सबसे ऊपरी जगह से भी सुना जा सकेगा, जो कि मुख्य द्वार से 91 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
ऐसा माना जाता है कि एक गुप्त सुरंग गोलकुंडा किले को चारमीनार से जोड़ती है। हलांकि इस संबंध में कोई प्रमाण नहीं मिला है।



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