थादलासकीन झील पर्यटक और स्थानीय लोगों के लिए एक चर्चित स्थल है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सज्जार नियांगली गांव के 290 विभिन्न जनजातीय लोगों ने जयंतिया राजा के क्रोध से बचने के लिए अपने धनुष से इस झील को खोदा था। आज भी रेद मुखाला जनजाति इस झील की पूजा करते हैं और इसके पास बलि भी चढ़ाते हैं।
ऐतिहासिक महत्व के अलावा थादलासकीन झील काफी सुंदर भी है और आउटिंग, पिकनिक व नौका विहार के लिए काफी लोकप्रिय है। यह झील एक खूबसूरत घास के मैदान और मिंतदु नदी से घिरा हुआ है। यहां आप कई तरह के दुर्लभ आर्किड भी देख सकते हैं। साथ ही झील के आसपास के वनस्पति व जीव जंतु आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। देखा जाए तो प्रकृतिप्रेमियों के लिए यह झील किसी स्वर्ण से कम नहीं है।
यह झील शिलांग से 58 किमी दूर है, जबकि जोवाई से यह सिर्फ 8 किमी दूर है। इन दोनों जगहों में से आप कहीं से भी टैक्सी बुक करके थादलासकीन झील पहुंच सकते हैं।



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