इस मंदिर की स्थापना हैहय वंश ने राजाओं ने करवाया था। यह जांजगीर के पुरानी बस्ती के पास भीमा तालाब के निकट स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 12 शताब्दी में किया गया था। पहले इसे दो भागों में बनाया गया था, लेकिन दोनों भागों का निर्माण एक ही समय में पूरा नहीं हुआ था।
आज के समय में भी यह अधूरा ही पड़ा है। मंदिर में देवी-देवताओं की अत्यंत सुंदर प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं। साथ ही आप यहां अवतार भी देख सकते हैं, जिसे गांधर्व और किन्नेर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोगों में यह मंदिर नकाता मंदिर के नाम से चर्चित है।



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