इसे मुगल पुल, अकबरी पुल और मुनीम खान पुल के नाम से भी जाना जाता है। इसे जौनपुर प्रांत के गवर्नर मुनीम खान ने मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में बनवाया था।
1568 से 1569 के बीच गोमती नदी पर बनाए गए इस पुल की डिजाइन अफगानी वास्तुकार अफजल अली ने तैयार की थी। यह पुल मुगल वास्तुशिल्प शैली में बने जौनपुर के उन कुछ महत्वपूर्ण स्थलों में से है, जिनका अस्तित्व आज भी बचा हुआ है।
इस पुल का निर्माण विशाल खंभो पर किया गया है और पानी के बहने के लिए 10 द्वार बनाए गए हैं। पुल से इतर इस पर खंभों पर टिकी अष्ठभुजीय आकार की गुंबजदार छतरी भी बनी हुई है। इस छतरी में लोग खुद को पुल पर दौड़ती वाहनों से सुरिक्षत रख कर नदी की बहती धाराओं का विहंगम नजारा देखते हैं।
शाही पुल जौनपुर शहर से 1.7 किमी उत्तर की ओर है और आज भी इसका इस्तेमाल यातायात के लिए किया जा रहा है।



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