इसे रानी महल इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह भारत की प्रसिद्ध योद्धा रानी, रानी लक्ष्मीबाई का महल था। इसका निर्माण नेवालकर परिवार के रघुनाथ – द्वितीय ने करवाया था। यह महल देशभक्ति बलों का केंद्र था जिसका नेतृत्व रानी और मराठा सरदारों तात्या टोपे और नाना साहिब ने किया था जिन्होनें 1857 में भारतीय स्वतंत्रता की पहली लड़ाई लड़ी।
रानी महल दो मंजिला इमारत है जिसकी छत सपाट है तथा इसे चौकोर आँगन के सामने बनाया गया है। आँगन के एक ओर कुआं है और दूसरी और फ़व्वारा है। इस महल में छह कक्ष हैं जिसमें प्रसिद्ध दरबार कक्ष भी शामिल है। ये कक्ष गलियारे के साथ साथ बनाये गए हैं जो एक दूसरे के समानांतर चलते हैं।
यहाँ कुछ छोटे कमरे भी हैं। दरबार कक्ष की दीवारों को विभिन्न वनस्पतियों और जीवजंतुओं के चमकदार रंगों वाले चित्रों से सजाया गया है। इस विशाल इमारत का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटिश तोपखाने द्वारा नष्ट कर दिया गया। इस महल को अब एक ऐतिहासिक संग्रहालय में बदल दिया गया है।



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