चंद्रकांता हांडिक भवन, असम साहित्य सभा के मुख्यालय के रूप में जाना जाता है। इस कार्यालय को राधाकांता हांडिक की स्मृति में 1926 में स्थापित किया गया था और इसे उन्ही के द्वारा दान में दिया गया था। चंद्रकांता हांडिक भवन, जोरहाट शहर के साहित्यिक उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में माना जाता है।
चंद्रकांता हांडिक भवन, न केवल असम साहित्य भवन के मुख्यालय के रूप में जाना जाता है बल्कि असमिया साहित्य के विकास और प्रसार के लिए भी इसका योगदान अमूल्य है। कई प्रभावशाली लेखक, इस भवन से जुड़े हुए है। इनमें से कुछ नाम है - दिम्बेश्वर निओग, चंद्रधर बरूआ और मित्रदेव मंहत, ये लोग इस सभा से नजदीक रूप से जुड़े हुए है।
चंद्रकांता हांडिक भवन की सैर पर्यटकों को जोरहाट के सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रभाव की झलक दिखाता है और राज्य में जोरहाट की प्रमुखता पर प्रकाश डालता है। चंद्रकांता हांडिक भवन, जोरहाट शहर के किसी भी हिस्से से आसानी से पहुंचा जा सकता है, यहां के लिए कई सार्वजनिक परिवहन या किराए पर वाहन भी चलते है।



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