श्रीकालाहस्ती का चतुर्मुखेश्वर मंदिर एक छोटा सा मंदिर है जो भगवान शिव और ब्रह्मा की पूजा को समर्पित है। इस स्थान के साथ जुड़ी भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा की शानदार कथाएं इस मंदिर को एक देखने योग्य स्थान बनाते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने उन्हें प्राप्त हुए कुछ पापों से छुटकारा पाने के लिए मंदिर के स्थल पर तपस्या की, इन पापों के कारण वे अपनी सृजन क्षमता खो चुके थे।
फिर भगवान ब्रह्मा ने भगवान शिव से प्रार्थना की और शिव के आशीर्वाद के बाद, भगवान ब्रह्मा ब्रह्मांड़ के निर्माण का कार्य शुरू करने में सक्षम हो गए। इस मंदिर की अनूठी बात यह है कि इस मंदिर के लिंग या शिव के चार चेहरे हैं जो अलग-अलग दिशाओं की ओर हैं।
‘चतुर्मुख’ शब्द का अर्थ है ‘चार चेहरे’। इस मंदिर में हर साल कई शिव भक्त भगवान शिव की शक्तियों की महिमा तथा उनका दिव्य आशीर्वाद लेने आते हैं। मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव से जुड़ी कई मिथक तथा किंवदंतियां उत्कीर्ण हैं।



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