कुमारी अम्मन मन्दिर या कन्याकुमारी मन्दिर समुद्रतट पर स्थित है और पार्वती, एक कुँवारी देवी जिन्होंने भगवान शिव से शादी करने के लिये स्वयं को सजा दिया थी, के एक अवतार को समर्पित है। कन्याकुमारी दो शब्दों कन्या अर्थात कुँवारी और कुमारी अर्थात लड़की से मिलकर बना है। कथाओं के अनुसार भगवान शिव और देवी कन्याकुमारी की शादी नहीं हुई, इसलिये कन्याकुमारी ने कुँवारी रहने का निश्चय किया।
ऐसा भी माना जाता है कि शादी के लिये एकत्रित किये गये अनाज बिना पकाये ही छोड़ दिया गया और सब पत्थरो में बदल गये। आज भी यात्री कभी न आयोजित हुई इस शादी की स्मृति में इन अनाज की तरह दिखने वाले पत्थरों को खरीद सकते हैं।
इस मन्दिर को आठवीं शताब्दी में पाण्ड्य शासकों ने बनावाया था और बाद में विजयनगर, चोल और नायक राजाओं द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया। कन्याकुमारी मन्दिर में 18वीं सदी का पवित्र स्थान भी है जहाँ पर्यटक देवी के पद चिन्हों को देख सकते हैं।



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