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होम » स्थल » केदारनाथ » आकर्षण
  • 01मन्दाकिनी नदी

    मन्दाकिनी नदी

    अलकनन्दा की सहायक नदी मन्दाकिनी नदी चाराबाड़ी हिमनदी से निकलती है। यह नदी सोनप्रयाग में वासुकीगंगा द्वारा पोषित होकर रूद्रप्रयाग में अलकनन्दा नदी से मिलती है और अन्त में देवप्रयाग में भागीरथी से मिलकर पवित्र गंगा नदी को जन्म देती है।

    मन्दाकिनी नदी में...

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  • 02केदारनाथ पर्वत

    केदारनाथ पर्वत पश्चिमी गढ़वाल के हिमालय में स्थित है। इसमें केदारनाथ और केदारनाथ गुम्बद नाम के दो पहाड़ हैं जिसमें कि केदारनाथ गुम्बद मुख्य चोटी के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 2 किमी की दूरी पर स्थित एक छोटी पहाड़ी है। इन दो पहाड़ियों को गंगोत्री के दक्षिणी भाग की...

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  • 03चोराबाड़ी ताल

    चोराबाड़ी ताल

    चोराबाड़ी ताल समुद्रतल से 3900 मी की ऊँचाई पर चोराबाड़ी बमक हिमनदी के मुहाने पर स्थित है। केदारनाथ और कीर्ति स्तम्भ चोटियों की तलहटी में स्थित यह स्थान हिमालय की चोटियों का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। इस ताल में महात्मा गाँधी की अस्थियों को विसर्जित किया गया था...

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  • 04रामबाढ़ा

    रामबाढ़ा

    रामबाढ़ा एक प्रमुख गाँव है जो केदारनाथ जाने वाले श्रृद्धालुओं के लिये आराम करने का स्थान है। यह छोटा सा गाँव 2591 मी की ऊँचाई पर स्थित है और केदारनाथ के 14 किमी लम्बे पैदलमार्ग के बीच में पड़ता है। गौरीकुण्ड इस स्थान से 7 किमी की दूरी पर है और केदारनाथ भी...

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  • 05अगस्त्यमुनि

    अगस्त्यमुनि 1000 मी की ऊँचाई पर मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह स्थान प्रसिद्ध हिन्दू मुनि अगस्त्य ऋषि का घर माना जाता है जिन्होंने ने यहाँ वर्षों तक तपस्या की। स्थानीय लोग इस मन्दिर को अगस्तेश्वर महादेव मन्दिर भी कहते हैं।

    मन्दिर के पत्थर की दीवारों...

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  • 06गौरीकुण्ड

    गौरीकुण्ड

    गौरीकुण्ड एक छोटा सा गाँव है जो केदारनाथ के लिये ट्रेकिंग आधार का कार्य करता है। 1982 मी की ऊँचाई पर स्थित इस स्थान पर हिन्दू देवी पार्वती को समर्पित एक बहुत ही पुराना मन्दिर है। ऐसा माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ देवी पार्वती ने भगवान शिव का हृदय जीतने के...

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  • 07केदार गिरिपिण्ड

    केदार गिरिपिण्ड

    केदार गिरिपिण्ड केदारनाथ, केदार गुम्बद और भारतेकुन्था नामक पहाड़ों से मिलकर बना है। यह 6000 मी की ऊँचाई पर स्थित है और यहीं से मन्दाकिनी जैसी कई हिमनदियाँ बहती हैं। केदारनाथ और केदारगुम्बद पर्वत एक दूसरे से खाँचों द्वारा जुड़े हैं।

    केदारनाथ पर्वत 6831 मी...

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  • 08सोनप्रयाग

    सोनप्रयाग

    सोनप्रयाग 1829 मी की ऊँचाई पर केदारनाथ से 19 किमी की दूरी पर स्थित है। यह वह स्थान है जहां पर बासुकी और मन्दाकिनी नदियाँ आपस में मिलती हैं। केदारनाथ के मार्ग पर स्थित अपने नदियों के पवित्र जल के कारण इस स्थान का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। ऐसा मानना है कि सोनप्रयाग...

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  • 09केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य

    केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य

    केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य सन् 1972 में स्थापित किया गया था और इसका नाम केदारनाथ मन्दिर के नाम पर ही रखा गया है। यह स्थान चमोली जिले की अलकनन्दा घाटी में स्थित है। यह 967 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है जहाँ पर ऐल्पाइन, कॉनीफेरस, बगयाल, ओक, चीड़, भूर्ज और कई अन्य...

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  • 10शंकराचार्य समाधि

    आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि केदारनाथ मन्दिर के पास ही स्थित है। श्री शंकराचार्य एक प्रसिद्ध हिन्दू सन्त थे जिन्होंने अद्वैत वेदान्त के ज्ञान के प्रसार के लिये दूर-दूर तक यात्राये कीं। ऐसा विश्वास है कि इन्होंने ही केदारनाथ मन्दिर को 8वीं शताब्दी में पुनर्निर्मित...

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  • 11केदारनाथ मन्दिर

    केदारनाथ मन्दिर

    केदारनाथ पर्वतश्रृंखलाओं में स्थित केदारनाथ मन्दिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है जहाँ पर हिन्दू भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग स्थापित है। केदारनाथ का ज्योतिर्लिंग 3584 मी की ऊँचाई पर स्थित है और बारहों ज्योतिर्लिंगों में सबसे महत्वपूर्ण है।

    आदि शंकराचार्य द्वारा...

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  • 12गुप्तकाशी

    गुप्तकाशी

    गुप्तकाशी अपने प्रसिद्ध पुराने विश्वनाथ मन्दिर, मणिकर्णिक कुण्ड और अर्द्धनारीश्वर मन्दिर के कारण लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है। अर्द्धनारीश्वर मन्दिर में भगवान शिव की मूर्ति आधे पुरूष और आधे स्त्री के रूप में स्थापित है। विश्वनाथ मन्दिर को हिन्दू भगवान शिव के कई...

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  • 13भैरवनाथ मन्दिर

    भैरवनाथ मन्दिर केदारनाथ मन्दिर से आधा किमी की दूरी पर स्थित है। यह मन्दिर विनाश के हिन्दू देवता शिव के एक गण भगवान भैरव के समर्पित है। 3001 ईसा पूर्व पहले रावल या राजपूत श्री भिकुण्ड ने मन्दिर में इष्टदेव की स्थापना की थी। मन्दिर के इष्टदेव को क्षेत्रपाल या...

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  • 14उखिमठ

    उखिमठ

    उखिमठ एक तीर्थ स्थल है जो समुद्र तल से 1311 मी की ऊँचाई पर रूद्रप्रयाग जिले के गोपेश्वर-गुप्तकाशी मार्ग पर स्थित है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ मन्दिर को बन्द करना पड़ता है और इस दौरान यहाँ के इष्टदेव की पूजा उखिमठ के ओंकारेश्वर मन्दिर में की जाती...

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  • 15ट्रेकिंग

    ट्रेकिंग

    केदारनाथ पर्यटकों को ट्रेकिंग के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। यह मन्दिर किसी भी सड़क के माध्यम से नहीं जुड़ा है इसलिये यात्री गौरीकुण्ड से यहाँ तक पहुँचने के लिये या तो हेलीकॉप्टर की सुविधा ले सकते हैं या फिर 14 किमी की ट्रेकिंग कर सकते हैं। सबसे लोकप्रिय...

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