कोलार की यात्रा करने वाले पर्यटकों को कोलार के सोने के क्षेत्रों की सैर करने की सलाह दी जाती है जो बांगरपेट तालुका में स्थित हैं। यह स्थान ब्रिटिश काल में सोने के उत्पादन के लिए जाना जाता था। औपनिवेशिक काल में यह शहर आंग्ल भारतीयों के अलावा इटली, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम के निवासियों का घर था। किसी समय में कोलार गोल्ड फील्ड भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड (बीजीएमएल) में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों का घर था। हालाँकि 2003 से माइंस के बंद होने के कारण इनकी संख्या बहुत कम हो गई है।
ब्रिटिश लोगों ने कोलार गोल्ड फील्ड को “लिटिल इंग्लैंड” का नाम दिया क्योंकि यहाँ का परिदृश्य तथा मौसम, तापमान आदि ब्रिटेन की तरह ही थे। इस स्थान का भ्रमण करने पर पर्यटकों को वे बंगले देखने का अवसर मिलता है जो ब्रिटिश वास्तुकला शैली में बने हुए हैं।
कोलार जापान के बाद एशिया का दूसरा शहर है जहाँ जल विद्युत् परियोजना द्वारा विद्युत् की आपूर्ति होती है। यह जलविद्युत परियोजना (शिवानासमुद्रा) दक्षिण भारत की प्रथम परियोजना है जिसका निर्माण 1902 में कोलार गोल्ड फील्ड के लिए विद्युत् उत्पादन के लिए किया गया था। पर्यटक यहाँ डोडाबेट्टा पहाड़ी की सैर भी कर सकते हैं जो कोलर गोल्ड फील्ड के पूर्व में 3195 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।



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