ज्योतिसार, शायद दुनिया के सबसे सम्माननीय तीर्थ केंद्रों में से एक है। ज्योतिसार में ही भगवान कृष्ण ने कुरूक्षेत्र के मैदान पर अर्जुन को भगवद् गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। यह वह स्थल है जहां से लडाई की शुरूआत हुई थी और युद्ध को प्रारम्भ करने की घोषणा की गई थी।
ऐसा माना जाता है कि इस स्थल के बारे में सर्वप्रथम आदि शंकराचार्य ने पता लगाया था, जब वह 9 वीं शताब्दी में हिमालय की यात्रा पर जा रहे थे। यहां कश्मीर के एक शासक ने भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर बनवाया था, जिसे 1850 ई. में धार्मिक महत्व दिया गया। मोर्नाच ऑफ दरभंगा, यहां पवित्र बरगद के पेड के चारो तरफ एक पत्थर के मंच सा बना हुआ है जहां खडे होकर भगवान श्री कृष्ण ने उपदेश दिया था।
इस जगह पर एक मूर्ति बनी हुई जिसमें भगवान श्रीकृष्ण, रथ पर सवार होकर सारथी के स्थान पर खडे है और अर्जुन को उपदेश दे रहे है, वहीं अर्जुन हाथ जोडे धरती पर विनम्रतापूर्वक खडे हुए है। इस मूर्ति को 1967 में ज्योतिसार में कांची कामा कोटि पीठ के शंकराचार्य द्वारा बनवाई गई है।
ज्योतिसार में हर शाम को लाइट और सांउड का आयोजन किया जाता है।



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