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होम » स्थल » कच्छ » आकर्षण
  • 01लखपत किला शहर

    लखपत कच्छ का एक छोटा सा कस्बा और उप-जिला है जिसका अर्थ होता है लखपतियों का शहर। यह शहर 18 वीं सदी के लखपत किले की चहारदीवारी में स्थित है। गुजरात और सिन्ध को जोड़ने के कारण यह शहर व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है।

    इस शहर का पतन 1819 ई0 के भूकम्प के...

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  • 02सियोट गुफायें

    सियोट गुफायें पहली शताब्दी ईसा पूर्व की हैं और इनका गर्भगृह और रास्ता पूरबमुखी है। इसे 7 वीं शताब्दी के चीनी यात्री द्वारा सिन्धु नदी के मुहाने पर बताई गई 80 बौद्ध धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।

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  • 03लघु रण जंगली गधा अभ्यारण्य

    गुजरात के कच्छ के रण में स्थित जंगली गधा अभ्यारण्य भारत का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य है। यह अभ्यारण्य 4954 किमी क्षेत्र में फैला है और इसमें विभिन्न प्रजाति के जन्तु और पक्षी पाये जाते हैं जिनमें भारतीय जंगली गधे की लुप्तप्राय प्रजाति के साथ-साथ चिंकारा,...

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  • 04बन्नी घास के मैदान

    बन्नी घास के मैदान

    बन्नी घास के मैदान वन क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं जिन्हें गुजरात राज्य के वन विभाग द्वारा संरक्षण प्राप्त है। पर्यटक क्षेत्र में पाये जाने वाले नीलगाय, चिंकारा, काला हिरण, जंगली भालू, सुनहरा सियार, एशियाई जंगली बिल्ली और मरूस्थलीय लोमड़ी जैसे वन्यजीवों को देखने के...

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  • 05नारायण सरोवर अभ्यारण्य

    नारायण सरोवर अभ्यारण्य

    नारायण सरोवर वन्यजीव अभ्यारण्य उन अभ्यारणों में शामिल है जिनमें विभिन्न प्रजातियों के साथ-साथ 15 लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं। चूँकि यहाँ केवल कठोर वातावरण के अभ्यस्त जीव ही रह सकते हैं इसलिये इस अभ्यारण्य में कुछ ऐसे जन्तु पाये जाते हैं जो कहीं और नहीं...

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  • 06कच्छ का दीर्घ रण

    गुजरात के कच्छ जिले के थार मरूस्थल में स्थित कच्छ का दीर्घ रण एक मौसमी दलदल है। यह विश्व का सबसे बड़ा लवणीय मरूस्थल है। दीर्घ रण 7505 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है और यह कच्छ के लघु रण की तुलना में थोड़ा बड़ा है। यह विभिन्न प्रकार जन्तु तथा पौधों की प्रजातियों...

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  • 07भुजियो डूँगर पहाड़ियाँ

    भुजियो डूँगर पहाड़ियाँ

    भुजियो डूँगर की पहाड़ियाँ 160 मीचर ऊँची हैं जहाँ से भुज शहर पूरा दिखता है और इन्ही पहाड़ियों की वजह से इस शहर का नाम भुज पड़ा।

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  • 08कच्छ बस्टर्ड अभयारण्य

    कच्छ बस्टर्ड अभयारण्य

    कच्छ बस्टर्ड अभयारण्य, जिसे लाला परजन अभ्यारण्य के रूप में भी जाना जाता है, को वर्ष 1992 में कच्छ के जखाऊ गाँव में ओटिडिडे पक्षी परिवार के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षी महान भारतीय तिलोर के संरक्षण के लिये स्थापित किया गया था। महान भारतीय तिलोर एक लुप्तप्राय प्रजाति...

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  • 09छड़ी धन्द संरक्षण रिज़र्व

    छड़ी धन्द संरक्षण रिज़र्व

    बन्नी के सूखे घास के मैदान और कच्छ के रण के लवण वाले सपाट क्षेत्र में स्थित छड़ी धन्द संरक्षण रिज़र्व वैधानिक रूप से संरक्षित दलदली क्षेत्र है। छड़ी का मतलब है नमक से प्रभावित और धन्द का सम्बन्ध छिछले दलदली इलाके से है।मॉनसून के दौरान आसपास की नदियों के पानी के...

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  • 10मथा नो मध

    मथा नो मध

    मथा नो मध वह स्थान है जहाँ कच्छ की प्रमुख देवी आशापुरा माता का प्रसिद्ध मन्दिर स्थित है। लखो फुलानी, अजो और अनागोर के पिता के शासनकाल के दो मन्त्रियों ने 14वीं शताब्दी में इस मन्दिर का निर्माण करवाया। गुजरात के कई इलाकों से भारी संख्या में भक्त इस मन्दिर तक पैदल...

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