जुमा मस्जिद, तीन गुंबदों और दो मीनारों के साथ लखनऊ में अवध के नवाबों के युग की विलासिता और संपन्नता के लिए एक उल्लेखनीय गवाह के रूप में खड़ा आज भी अपनी दास्ंता कहता है। नबाव मोहम्मद अली शाह एक ऐसी मस्जिद बनाना चाहते थे जो देश के अन्य मस्जिदों से ज्यादा भव्य और आकर्षक हो। हालांकि, बाद में वह जीर्ण गठिया से पीडि़त हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत से उनका ड्रीम प्रोजेक्ट अधूरा ही रह गया और बाद में उनकी बेगम ने इसे पूरा करवाया। उनकी बेगम का नाम बेगम मल्लिका जेहन था।
यह बड़ी सी मस्जिद 4950 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इस मस्जिद की वास्तुकला डिजाइन, अति सुंदर सजावट, नक्काशी और मस्जिद की दीवारों पर की गई लिखाई, हिंदू और जैन धर्म के प्रभाव को दर्शाती है। इस मस्जिद की आंतरिक दीवारें चकमकदार शीशों, सिल्वर पलपिट्स, मुगल शैली के भित्ति चित्र और शानदार झाड़ से सजाई गई हैं।
मस्जिद की धनुषाकार गुंबदें 260 खंभों पर खड़ी हुई हैं। इस इमारत के पूर्वी हिस्से में अहमद शाह की कब्र भी स्थित है।



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