माजुली सतरों के लिए जाना जाता है और बेंगानाती एक प्रमुख सतरा है। यहां कई पुरानी चीजों का विस्तृत संकलन है, जिसका सांस्कृतिक दृष्टि से काफी महत्व है। यहां एक उच्च श्रेणी का कला अभिनय केन्द्र भी है, जिसकी स्थापना श्रीमंत शंकरदेव की सौतेली मां के पोते मुरारीदेव ने किया था।
माजुली द्वीप के अन्य सतरों की तरह बेंगानाती सतरा भी न सिर्फ संस्कृति और श्रीमंत शंकरदेव की शिक्षा के लिए जाना जाता है, बल्कि यह प्रचीन शिल्पकृति के लिए म्यूजियम का भी काम करता है। शाही पोशाक इस सतरा की सबसे प्रसिद्ध शिल्पकृति है, जो कि अहोम राजा स्वर्गदेव गदाधर सिंघ का है।
सोने की इस पोशाक के अलावा यहां अहोम राजा के सोने का छाता भी मौजूद है। इन दोनों बहुमूल्य चीजों को यहां संरक्षित किया गया है। बेंगानाती सतरा जाने के लिए आपको जोरहट के नीमाती घाट से माजुली पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ेगा।



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