मैंगलोर पर्यटन - कर्नाटक का प्रवेश द्वार

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अक्सर कहा जाता है कि मैंगलोर कर्नाटक का प्रवेश द्वार है। खूबसूरत मैंगलोर शहर अरब सागर के नीले पानी और पश्चिमी घाट के हरे, विशाल पहाड़ों के बीच बसा हुआ है। इस शहर का नाम भगवान मंगला देवी के नाम पर पड़ा, मैंगलोर चहलकदमी से भरा बंदरगाह रहा है। बंदरगाह के इस शहर का पहला संदर्भ 14वीं सदी में मिलता है, जब स्‍थानीय शासकों ने फारस की खाड़ी में राज्यों के साथ व्यापार संबंधों की स्थापना की।

अपनी सामरिक स्थिति के चलते, मैंगलोर में कई बार बदलाव आये। पुर्तगाली, ब्रिटिश और मैसूर शासक हैदर अली और टीपू सुल्तान ने इस शहर पर कब्‍जा करने के लिए कड़वी लड़ाईयां लड़ीं। इस खूबसूरत शहर में विभिन्‍न शसकों ने अपनी छाप छोड़ी और आज मैंगलोर विभिन्न संस्कृतियों के एक समामेलन है।

इस के अलावा, शहर ने भारत में प्रमुख बंदरगाहों के रूप में अपने महत्व को बरकरार रखा है और भारत में कॉफी और काजू के एक बड़े हिस्से का निर्यात यहीं से होता है।

प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग

मंगलौर की प्राकृतिक सुंदरता इसे एक ऐसा छोर देती है, जिसे हराना मुश्किल है। 132.45 वर्ग किमी का शहर दो नदियों, नेत्रवती और गुरपुर के अप्रवाही जल पर फैला हुआ है। अरब सागर के तट के किनारे सुनहरे तटों के साथ लहराते हुए पाम हैं। यह चौंकने वाली छवि ह‍री - भरी पहाडि़यों और पारम्‍परिक घरों से भरी है,जिसकी छतें लाल रंग की खपरैल वाली छत होती है और यहां 6 लाख निवासी रहते हैं।

परंपरा और संस्कृति

मंगलौर का प्रोफाइल अत्यंत विविध जनसंख्या और कई भाषाओं वाला है। शहर बहु - धार्मिक प्रोफाइल वाला है और यहां बोली जाने वाली चार भाषाएं तुलु, कोंकणी, बियरी और कन्नड़ हैं। शहर की संस्कृति और परंपराओं के अद्भुत मिलन में इसका योगदान है। शहर में यक्षगान, कृष्ण जन्माष्टमी और कराडी वेशा नृत्य की तरह सही मायने में कुछ अनूठी सांस्कृतिक परंपराएं हैं। वास्तव में, मंगलौर में दशहरा उत्सव अपने शाही वैभव के लिए प्रसिद्ध है और दुनिया भर से लोगों को अपनी ओर खींचता है।

देखने और करने के लिए बहुत कुछ - मंगलौर में पर्यटन स्थल

मंगलौर में प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही विरासत स्थलों की कई पेशकश है। मंगलादेवी मंदिर में देश भर से हजारों तीर्थयात्री आते हैं। अन्य पुराने मंदिर और भवन, जिन्होंने अपना चरित्र मंगलौर को दिया है वे हैं कादरी मंजूनाथा मंदिर, सेंट एलॉयसियस चैपल, रोसारियो कैथेड्रल और जामा मस्जिद।

जो लोग सूर्य और सुनहरी रेत से प्यार करते हैं, उनके लिए सोमेश्वर और तन्‍नीरभावी जैसे तेजस्वी समुद्र तट हैं। मंगलौर के स्थान ने सदियों से कई आगंतुकों को आकर्षित किया है, और यह अभी तक जारी रहने वाली प्रवत्ति है, जिसने इस खूबसूरत शहर को एक लोकप्रिय गंतव्य बनाया है।

मंगलौर तक कैसे पहुंचे

मंगलौर वायुमार्ग, रेल और सड़क परिवहन से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

मंगलौर मौसम

सर्दी का मौसम मैंगलोर की यात्रा की योजना के लिए उपयुक्त समय है। दिसम्बर-मार्च यहां की यात्रा के लिए आदर्श महीने हैं।

 

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