लाबरांग मठ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘लामा का निवास स्थान।’ 1814 में ग्यालशे रिगजिंग चेंपा से मान्यता मिलने के करीब 70 साल बाद 1884 में इस मठ का निर्माण करवाया गया था। इस मठ के भिक्षु तिब्बती बौद्ध धर्म के निन्यंगमपा स्कूल के सिद्धांतों का अनुसरण करते हैं। मठ का निर्माण तिब्बत में कोंगपु के लात्सुं चेंबो के सम्मान में किया गया है, जिन्हें सिक्किम में एक बौद्ध धर्म स्कूल की स्थापना के लिए भी याद रखा जाता है।
लाबरांग मठ उत्तरी सिक्किम हाइवे पर फोडोंग मठ से 2 किमी दूर है। एक ओर जहां सिक्किम के अधिकांश मठ आग के कारण बर्बाद हो गए, वहीं लाबरांग मठ ने अभी तक अपने मूल संरचना को बरकरार रखा है।
मठ के प्रार्थना कक्ष में भित्ती चित्रों के द्वारा प्रसिद्ध पद्मसंभव मुद्रा को 1022 बार दर्शाया गया है। ऊपरी मंजिल पर एक मूर्ति है जिसका सिर कटा हुआ है और उन्होंने एक माला महन रखी है। यहां हर साल दिसंबर में चाम नृत्य का भी आयोजन किया जाता है।



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