खिचिंग, प्राचीन युग के बाद का एक मंदिर शहर है। यह शहर, भांज वशं की राजधानी हुआ करती थी जो 9 वीं और 12 वीं शताब्दी के शासक हुआ करते थे। इस शहर की कला, वास्तुकला और संस्कृति की झलक आज भी यहां देखने को मिलती है। भंज वशं के शासकों के अवशेष आज भी पाएं जाते है उन्ही लोगों ने यहां मां किचकेश्वरी देवी की पूजा करनी शुरू की थी। मां किचकेश्वरी के मंदिर में हर साल मयूरभंज के हजारों पयर्टक दर्शन करने आते है।
इस मंदिर ने कई शासकों के शासन देखे है जिसे कई बार बनवाया गया और कई बार नष्ट करवाया गया। इसे भांज वंश के शासक महाराजा पूर्ण चंद्र भांज देव के द्वारा पुन: बनवाया गया था और उनके भाई ने भी 1925 में इसे बनवाने में उनका सहयोग दिया था।
इसी मंदिर के पास में एक संग्रहालय स्थित है जहां कई प्रकार की कलाकृतियां और मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया है। इस स्थान की यात्रा का सबसे अच्छा समय शिवरात्रि के दौरान होता है। इस अवधि में यहां सबसे ज्यादा शांति का सौहार्द का माहौल देखने को मिलता है।



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